Sahityapedia
Login Create Account
Home
Search
Dashboard
Notifications
Settings
10 Oct 2023 · 1 min read

#justareminderdrarunkumarshastri

#justareminderdrarunkumarshastri
जब हम नहीं होंगे तब कैसे चलेगी ये धरती ?
वैसे ही, जब हम नहीं थे तब चलती थी ये धरती ॥
तुम्हारी जरूरत न अब है न तब थी और आगे भी नहीं होगी हे अभिमानी अहंकारी मनुष्य तू है कौन ?

272 Views
📢 Stay Updated with Sahityapedia!
Join our official announcements group on WhatsApp to receive all the major updates from Sahityapedia directly on your phone.
Books from DR ARUN KUMAR SHASTRI
View all
You may also like:
NUMB
NUMB
Vedha Singh
Mental Health
Mental Health
Bidyadhar Mantry
जिस दिन कविता से लोगों के,
जिस दिन कविता से लोगों के,
जगदीश शर्मा सहज
"शीशा और रिश्ता बड़े ही नाजुक होते हैं
शेखर सिंह
मुस्कान
मुस्कान
Santosh Shrivastava
कुछ तो तुझ से मेरा राब्ता रहा होगा।
कुछ तो तुझ से मेरा राब्ता रहा होगा।
Ahtesham Ahmad
*माता (कुंडलिया)*
*माता (कुंडलिया)*
Ravi Prakash
कहते हैं कि मृत्यु चुपचाप आती है। बेख़बर। वह चुपके से आती है
कहते हैं कि मृत्यु चुपचाप आती है। बेख़बर। वह चुपके से आती है
Dr Tabassum Jahan
रास्ते और राह ही तो होते है
रास्ते और राह ही तो होते है
Neeraj Agarwal
प्रकृति के आगे विज्ञान फेल
प्रकृति के आगे विज्ञान फेल
ऐ./सी.राकेश देवडे़ बिरसावादी
'रामबाण' : धार्मिक विकार से चालित मुहावरेदार शब्द / DR. MUSAFIR BAITHA
'रामबाण' : धार्मिक विकार से चालित मुहावरेदार शब्द / DR. MUSAFIR BAITHA
Dr MusafiR BaithA
*और ऊपर उठती गयी.......मेरी माँ*
*और ऊपर उठती गयी.......मेरी माँ*
Poonam Matia
#वाल्मीकि_जयंती
#वाल्मीकि_जयंती
*Author प्रणय प्रभात*
3308.⚘ *पूर्णिका* ⚘
3308.⚘ *पूर्णिका* ⚘
Dr.Khedu Bharti
दोहा
दोहा
दुष्यन्त 'बाबा'
ज़िंदगी में बेहतर नज़र आने का
ज़िंदगी में बेहतर नज़र आने का
Dr fauzia Naseem shad
ਦਿਲ  ਦੇ ਦਰਵਾਜੇ ਤੇ ਫਿਰ  ਦੇ ਰਿਹਾ ਦਸਤਕ ਕੋਈ ।
ਦਿਲ ਦੇ ਦਰਵਾਜੇ ਤੇ ਫਿਰ ਦੇ ਰਿਹਾ ਦਸਤਕ ਕੋਈ ।
Surinder blackpen
तुम्हारा हर लहज़ा, हर अंदाज़,
तुम्हारा हर लहज़ा, हर अंदाज़,
ओसमणी साहू 'ओश'
जो भी मिलता है उससे हम
जो भी मिलता है उससे हम
Shweta Soni
* प्रीति का भाव *
* प्रीति का भाव *
surenderpal vaidya
ऐ भाई - दीपक नीलपदम्
ऐ भाई - दीपक नीलपदम्
नील पदम् Deepak Kumar Srivastava (दीपक )(Neel Padam)
बात
बात
Ajay Mishra
रमेशराज के मौसमविशेष के बालगीत
रमेशराज के मौसमविशेष के बालगीत
कवि रमेशराज
कर्म कांड से बचते बचाते.
कर्म कांड से बचते बचाते.
Mahender Singh
अक्ल के दुश्मन
अक्ल के दुश्मन
Shekhar Chandra Mitra
राम-हाथ सब सौंप कर, सुगम बना लो राह।
राम-हाथ सब सौंप कर, सुगम बना लो राह।
डॉ.सीमा अग्रवाल
दुर्लभ हुईं सात्विक विचारों की श्रृंखला
दुर्लभ हुईं सात्विक विचारों की श्रृंखला
अनिल कुमार गुप्ता 'अंजुम'
इंसान स्वार्थी इसलिए है क्योंकि वह बिना स्वार्थ के किसी भी क
इंसान स्वार्थी इसलिए है क्योंकि वह बिना स्वार्थ के किसी भी क
Rj Anand Prajapati
*बुंदेली दोहा-चिनार-पहचान*
*बुंदेली दोहा-चिनार-पहचान*
राजीव नामदेव 'राना लिधौरी'
हवाओ में हुं महसूस करो
हवाओ में हुं महसूस करो
Rituraj shivem verma
Loading...