Sahityapedia
Login Create Account
Home
Search
Dashboard
Notifications
Settings
24 Jan 2024 · 1 min read

2952.*पूर्णिका*

2952.*पूर्णिका*
🌷 अपना रास्ता अपनी मंजिल 🌷
22 22 22 22
अपना रास्ता अपनी मंजिल।
तू चल कहता है मेरा दिल।।
बदले बदले आज जमाना।
घूमते फिरते हरदम कातिल ।।
खुशियाँ भी मिलती रोज हमें ।
पार लगाते दरिया साहिल ।।
हम वक्त के साथ चले यारों।
सुख दुख में और रहे शामिल ।।
साथ खड़ा देख यहाँ खेदू।
माने कहना बनते काबिल।।
………..✍ डॉ .खेदू भारती”सत्येश”
24-01-2024बुधवार

43 Views
📢 Stay Updated with Sahityapedia!
Join our official announcements group on WhatsApp to receive all the major updates from Sahityapedia directly on your phone.
You may also like:
विषधर
विषधर
Rajesh
फिर क्यूँ मुझे?
फिर क्यूँ मुझे?
Pratibha Pandey
बच्चे कहाँ सोयेंगे...???
बच्चे कहाँ सोयेंगे...???
Kanchan Khanna
मुझमें एक जन सेवक है,
मुझमें एक जन सेवक है,
Punam Pande
*स्वतंत्रता सेनानी स्वर्गीय श्री राम कुमार बजाज*
*स्वतंत्रता सेनानी स्वर्गीय श्री राम कुमार बजाज*
Ravi Prakash
सदा किया संघर्ष सरहद पर,विजयी इतिहास हमारा।
सदा किया संघर्ष सरहद पर,विजयी इतिहास हमारा।
Neelam Sharma
मुक्त पुरूष #...वो चला गया.....
मुक्त पुरूष #...वो चला गया.....
Santosh Soni
आने वाले कल का ना इतना इंतजार करो ,
आने वाले कल का ना इतना इंतजार करो ,
Neerja Sharma
गम के बगैर
गम के बगैर
Swami Ganganiya
मेरी शायरी
मेरी शायरी
सोलंकी प्रशांत (An Explorer Of Life)
जबसे उनके हाथ पीले हो गये
जबसे उनके हाथ पीले हो गये
महावीर उत्तरांचली • Mahavir Uttranchali
जीवन मर्म
जीवन मर्म
सुशील मिश्रा ' क्षितिज राज '
तुम मेरे हो
तुम मेरे हो
लक्ष्मी वर्मा प्रतीक्षा
मुस्कुराते रहे
मुस्कुराते रहे
Dr. Sunita Singh
💐प्रेम कौतुक-523💐
💐प्रेम कौतुक-523💐
शिवाभिषेक: 'आनन्द'(अभिषेक पाराशर)
वह पढ़ता या पढ़ती है जब
वह पढ़ता या पढ़ती है जब
gurudeenverma198
मुझे तो मेरी फितरत पे नाज है
मुझे तो मेरी फितरत पे नाज है
नेताम आर सी
अब तक नहीं मिला है ये मेरी खता नहीं।
अब तक नहीं मिला है ये मेरी खता नहीं।
सत्य कुमार प्रेमी
बेटा राजदुलारा होता है?
बेटा राजदुलारा होता है?
Rekha khichi
आ अब लौट चले
आ अब लौट चले
Dr. Ramesh Kumar Nirmesh
"सूत्र-सिद्धान्त"
Dr. Kishan tandon kranti
*यौगिक क्रिया सा ये कवि दल*
*यौगिक क्रिया सा ये कवि दल*
DR ARUN KUMAR SHASTRI
सारी फिज़ाएं छुप सी गई हैं
सारी फिज़ाएं छुप सी गई हैं
VINOD CHAUHAN
ये शास्वत है कि हम सभी ईश्वर अंश है। परंतु सबकी परिस्थितियां
ये शास्वत है कि हम सभी ईश्वर अंश है। परंतु सबकी परिस्थितियां
Sanjay ' शून्य'
मार गई मंहगाई कैसे होगी पढ़ाई🙏✍️🙏
मार गई मंहगाई कैसे होगी पढ़ाई🙏✍️🙏
तारकेश्‍वर प्रसाद तरुण
मौत से लड़ती जिंदगी..✍️🤔💯🌾🌷🌿
मौत से लड़ती जिंदगी..✍️🤔💯🌾🌷🌿
Ms.Ankit Halke jha
धड़कन से धड़कन मिली,
धड़कन से धड़कन मिली,
sushil sarna
अदालत में क्रन्तिकारी मदनलाल धींगरा की सिंह-गर्जना
अदालत में क्रन्तिकारी मदनलाल धींगरा की सिंह-गर्जना
कवि रमेशराज
2999.*पूर्णिका*
2999.*पूर्णिका*
Dr.Khedu Bharti
मारे ऊँची धाक,कहे मैं पंडित ऊँँचा
मारे ऊँची धाक,कहे मैं पंडित ऊँँचा
Pt. Brajesh Kumar Nayak
Loading...