Sahityapedia
Login Create Account
Home
Search
Dashboard
Notifications
Settings
13 Feb 2024 · 1 min read

17. बेखबर

इंतहाँ चाहत की तुम्ही से ना होगी क्यूँ मगर,
इश्क के गलियारों में बिखरे हैं सपने दरबदर;
ना देखो तुम मुझे अश्क में डूबे इस कदर,
नज़र – नज़र में देखे हैं मैंने ज़िंदगी के सब पहर;
चाँद ढल गया आधी रात और सूरज रहा बेखबर।

इधर उधर की बात रख, नज़र मिला उसी से तू,
जो तेरा बनकर बैठा है, बस तुझे ना आए नज़र;
सूरतें रुकसत होती रहीं हैं होती रहेगी हर दफा,
हृदय में एक अंकुर हुआ है, मंजिल जिसकी आदिम सफर;
चाँद ढल गया आधी रात और सूरज रहा बेखबर।

जो आब भी ना धो सके, वो दाग है बेवफाई,
खुशियों की चादर लपेटे राज़ दफन है तनहाई;
महबूब की खातिर हर सांस में दुआ पढ़ते घुमंतू कभी,
इश्क किसी का हो ना सका, ज़माने ने घोला ऐसा ज़हर;
चाँद ढल गया आधी रात और सूरज रहा बेखबर।

~राजीव दत्ता ‘घुमंतू’

Language: Hindi
60 Views
📢 Stay Updated with Sahityapedia!
Join our official announcements group on WhatsApp to receive all the major updates from Sahityapedia directly on your phone.
You may also like:
सहकारी युग ,हिंदी साप्ताहिक का 15 वाँ वर्ष { 1973 - 74 }*
सहकारी युग ,हिंदी साप्ताहिक का 15 वाँ वर्ष { 1973 - 74 }*
Ravi Prakash
तन्हाई में अपनी
तन्हाई में अपनी
हिमांशु Kulshrestha
3) मैं किताब हूँ
3) मैं किताब हूँ
पूनम झा 'प्रथमा'
*मैं पक्षी होती
*मैं पक्षी होती
Madhu Shah
फ्राॅड की कमाई
फ्राॅड की कमाई
Punam Pande
वो कहती हैं ग़ैर हों तुम अब! हम तुमसे प्यार नहीं करते
वो कहती हैं ग़ैर हों तुम अब! हम तुमसे प्यार नहीं करते
The_dk_poetry
दिन भी बहके से हुए रातें आवारा हो गईं।
दिन भी बहके से हुए रातें आवारा हो गईं।
सत्य कुमार प्रेमी
देखो-देखो आया सावन।
देखो-देखो आया सावन।
लक्ष्मी सिंह
दया समता समर्पण त्याग के आदर्श रघुनंदन।
दया समता समर्पण त्याग के आदर्श रघुनंदन।
जगदीश शर्मा सहज
मिलन फूलों का फूलों से हुआ है_
मिलन फूलों का फूलों से हुआ है_
Rajesh vyas
धैर्य वह सम्पत्ति है जो जितनी अधिक आपके पास होगी आप उतने ही
धैर्य वह सम्पत्ति है जो जितनी अधिक आपके पास होगी आप उतने ही
ओम प्रकाश श्रीवास्तव
■ प्रयोगात्मक कवित-
■ प्रयोगात्मक कवित-
*प्रणय प्रभात*
हजारों लोग मिलेंगे तुम्हें
हजारों लोग मिलेंगे तुम्हें
ruby kumari
ठगी
ठगी
भवानी सिंह धानका 'भूधर'
मईया के आने कि आहट
मईया के आने कि आहट
नंदलाल मणि त्रिपाठी पीताम्बर
दो शे'र
दो शे'र
डॉक्टर वासिफ़ काज़ी
गुलाबों का सौन्दर्य
गुलाबों का सौन्दर्य
Ritu Asooja
"गुमनाम जिन्दगी ”
Pushpraj Anant
"तफ्तीश"
Dr. Kishan tandon kranti
एक इस आदत से, बदनाम यहाँ हम हो गए
एक इस आदत से, बदनाम यहाँ हम हो गए
gurudeenverma198
गांधी जी के आत्मीय (व्यंग्य लघुकथा)
गांधी जी के आत्मीय (व्यंग्य लघुकथा)
गुमनाम 'बाबा'
नववर्ष
नववर्ष
Mukesh Kumar Sonkar
नए मुहावरे का चाँद
नए मुहावरे का चाँद
Dr MusafiR BaithA
भारत के लाल को भारत रत्न
भारत के लाल को भारत रत्न
सुरेश कुमार चतुर्वेदी
दर्द अपना संवार
दर्द अपना संवार
Dr fauzia Naseem shad
जब  सारे  दरवाजे  बंद  हो  जाते  है....
जब सारे दरवाजे बंद हो जाते है....
shabina. Naaz
👉अगर तुम घन्टो तक उसकी ब्रेकअप स्टोरी बिना बोर हुए सुन लेते
👉अगर तुम घन्टो तक उसकी ब्रेकअप स्टोरी बिना बोर हुए सुन लेते
पूर्वार्थ
"मैं" एहसास ऐ!
Harminder Kaur
मोहब्बत की राहों मे चलना सिखाये कोई।
मोहब्बत की राहों मे चलना सिखाये कोई।
Rajendra Kushwaha
हुनर हर जिंदगी का आपने हमको सिखा दिया।
हुनर हर जिंदगी का आपने हमको सिखा दिया।
Phool gufran
Loading...