Sahityapedia
Sign in
Home
Search
Dashboard
Notifications
Settings
21 Feb 2023 · 1 min read

बाँकी अछि हमर दूधक कर्ज / मातृभाषा दिवश पर हमर एक गाेट कविता

बाँकी अछि हमर दूधक कर्ज

केहन सपना हम मीता देखलौँ भोर में ।
माय मिथिला जगाबथि भरल नोर में ।।
कहथि रने वने घुमी अपन अधिकार लेल ।
छैं तूँ सुतल छुब्ध छी तोहर बिचार लेल ।।

कनिको बातपर हमरा तूं करै विचार ।
की सुतलासँ ककरो भेटलै अछि अधिकार ।।
जोरि एक एक हाथ बनवै जो लाखों हाथ ।
कर हिम्मत तूं पुत्र छियौ हम तोहर साथ ।।

अछि तोरापर बाँकी हमर दूधक कर्ज ।
करै एहिबेर तूं पुरा सबटा अपन फर्ज ।।
लौटादे हमर आब अपन स्वाभिमान ।
पुत्र कहेबे तूं महान हेतौ कर्म महान ।।

#मिथिला_बिहारी_नगरपालिका
#मिथिलेश्वर_मौवाही – ३
#धनुषा , #नेपाल

Language: Maithili
2 Likes · 187 Views

You may also like these posts

"ख्वाब"
Dr. Kishan tandon kranti
लहरों ने टूटी कश्ती को कमतर समझ लिया
लहरों ने टूटी कश्ती को कमतर समझ लिया
अंसार एटवी
जब तक हम जीवित रहते हैं तो हम सबसे डरते हैं
जब तक हम जीवित रहते हैं तो हम सबसे डरते हैं
Sonam Puneet Dubey
अंधेरे की रोशनी हो तुम।
अंधेरे की रोशनी हो तुम।
Rj Anand Prajapati
प्यार की लौ
प्यार की लौ
Surinder blackpen
श्रंगार
श्रंगार
Vipin Jain
..
..
*प्रणय*
ग़ज़ल 1
ग़ज़ल 1
Deepesh Dwivedi
चौमासा विरहा
चौमासा विरहा
लक्ष्मी सिंह
21. Tale of An Eve
21. Tale of An Eve
Ahtesham Ahmad
जब एक ज़िंदगी है
जब एक ज़िंदगी है
Dr fauzia Naseem shad
लोग महापुरुषों एवम् बड़ी हस्तियों के छोटे से विचार को भी काफ
लोग महापुरुषों एवम् बड़ी हस्तियों के छोटे से विचार को भी काफ
Rj Anand Prajapati
सविधान दिवस
सविधान दिवस
Ranjeet kumar patre
रोजालिण्ड बनाम डेसडिमोना
रोजालिण्ड बनाम डेसडिमोना
Saraswati Bajpai
सबकी जिंदगी में कोई ना कोई शख्स  ख़ास ज़रूर बनता है
सबकी जिंदगी में कोई ना कोई शख्स ख़ास ज़रूर बनता है
Rekha khichi
ग़ज़ल _ नहीं भूल पाए , ख़तरनाक मंज़र।
ग़ज़ल _ नहीं भूल पाए , ख़तरनाक मंज़र।
Neelofar Khan
किसे फुरसत है
किसे फुरसत है
Suman (Aditi Angel 🧚🏻)
*श्री महेश राही जी (श्रद्धाँजलि/गीतिका)*
*श्री महेश राही जी (श्रद्धाँजलि/गीतिका)*
Ravi Prakash
बड़े भाग मानुष तन पावा
बड़े भाग मानुष तन पावा
आकांक्षा राय
3581.💐 *पूर्णिका* 💐
3581.💐 *पूर्णिका* 💐
Dr.Khedu Bharti
भले लोगों के साथ ही बुरा क्यों (लघुकथा)
भले लोगों के साथ ही बुरा क्यों (लघुकथा)
Indu Singh
- वो दुपट्टे वाली लड़की -
- वो दुपट्टे वाली लड़की -
bharat gehlot
ग़ज़ल
ग़ज़ल
ईश्वर दयाल गोस्वामी
पानी से पानी पर लिखना
पानी से पानी पर लिखना
Ramswaroop Dinkar
मोहब्बत के लिए गुलकारियां दोनों तरफ से है। झगड़ने को मगर तैयारियां दोनों तरफ से। ❤️ नुमाइश के लिए अब गुफ्तगू होती है मिलने पर। मगर अंदर से तो बेजारियां दोनो तरफ से हैं। ❤️
मोहब्बत के लिए गुलकारियां दोनों तरफ से है। झगड़ने को मगर तैयारियां दोनों तरफ से। ❤️ नुमाइश के लिए अब गुफ्तगू होती है मिलने पर। मगर अंदर से तो बेजारियां दोनो तरफ से हैं। ❤️
डॉ सगीर अहमद सिद्दीकी Dr SAGHEER AHMAD
अनपढ़ सी
अनपढ़ सी
SHAMA PARVEEN
हर
हर "प्राण" है निलय छोड़ता
Atul "Krishn"
गणगौर का त्योहार
गणगौर का त्योहार
Savitri Dhayal
शिकायत नही किसी से
शिकायत नही किसी से
Kaviraag
जिंदगी कैसी पहेली
जिंदगी कैसी पहेली
Sudhir srivastava
Loading...