Sahityapedia
Login Create Account
Home
Search
Dashboard
Notifications
Settings
23 Dec 2023 · 1 min read

🙏 🌹गुरु चरणों की धूल🌹 🙏

🙏 🌹गुरु चरणों की धूल🌹 🙏
वतर्ज-हमने देखी है इन आँखों की महकती खुश्बू

शबनमी आँखों से बरखा सी बरसती
है तू।
वसंत के बादभी गुलिस्तां में महकती है तू।।
नूर मह्सूस र्कें नबीं मिटाके जग से तमको।
ये चमन उजड़ते ही ज़फा दिखलाती
है तू।
संग में कुछ साथ चलना भी नही सुहाता है।
बोली जुवांन से तीर कमान से चलाती
है तू।।
बेदर्द ज़माने को खुशियाँ कहाँ सुहाती
हैं।
घर के भेदी तरह दिलें राज बताती
है तू।।
रँगी राही गुरु चरणों की धूल जग का मेला।
कनक झनक स्वर सरि धारा बहाती
है तू।।
✍जूनियर झनक कैलाश अज्ञानी
झाँसी उ•प्र•

99 Views
📢 Stay Updated with Sahityapedia!
Join our official announcements group on WhatsApp to receive all the major updates from Sahityapedia directly on your phone.
You may also like:
2290.पूर्णिका
2290.पूर्णिका
Dr.Khedu Bharti
💐प्रेम कौतुक-417💐
💐प्रेम कौतुक-417💐
शिवाभिषेक: 'आनन्द'(अभिषेक पाराशर)
दिन तो खैर निकल ही जाते है, बस एक रात है जो कटती नहीं
दिन तो खैर निकल ही जाते है, बस एक रात है जो कटती नहीं
पूर्वार्थ
Ghazal
Ghazal
shahab uddin shah kannauji
हम हँसते-हँसते रो बैठे
हम हँसते-हँसते रो बैठे
नंदलाल सिंह 'कांतिपति'
हसरतें हर रोज मरती रहीं,अपने ही गाँव में ,
हसरतें हर रोज मरती रहीं,अपने ही गाँव में ,
Pakhi Jain
ये आँधियाँ हालातों की, क्या इस बार जीत पायेगी ।
ये आँधियाँ हालातों की, क्या इस बार जीत पायेगी ।
Manisha Manjari
!! दर्द भरी ख़बरें !!
!! दर्द भरी ख़बरें !!
Chunnu Lal Gupta
हम उनसे नहीं है भिन्न
हम उनसे नहीं है भिन्न
जगदीश लववंशी
ना मुराद फरीदाबाद
ना मुराद फरीदाबाद
ओनिका सेतिया 'अनु '
*वधू (बाल कविता)*
*वधू (बाल कविता)*
Ravi Prakash
अहंकार का एटम
अहंकार का एटम
डॉ०छोटेलाल सिंह 'मनमीत'
आह जो लब से निकलती....
आह जो लब से निकलती....
अश्क चिरैयाकोटी
'गुमान' हिंदी ग़ज़ल
'गुमान' हिंदी ग़ज़ल
Dr. Asha Kumar Rastogi M.D.(Medicine),DTCD
नारी वो…जो..
नारी वो…जो..
Rekha Drolia
जब कोई बात समझ में ना आए तो वक्त हालात पर ही छोड़ दो ,कुछ सम
जब कोई बात समझ में ना आए तो वक्त हालात पर ही छोड़ दो ,कुछ सम
Shashi kala vyas
परछाइयों के शहर में
परछाइयों के शहर में
Surinder blackpen
कर्म परायण लोग कर्म भूल गए हैं
कर्म परायण लोग कर्म भूल गए हैं
प्रेमदास वसु सुरेखा
तकते थे हम चांद सितारे
तकते थे हम चांद सितारे
Suryakant Dwivedi
ज़िंदादिली
ज़िंदादिली
Dr.S.P. Gautam
काफी है
काफी है
Basant Bhagawan Roy
ईश्वर से शिकायत क्यों...
ईश्वर से शिकायत क्यों...
Radhakishan R. Mundhra
ख़राब आदमी
ख़राब आदमी
Dr MusafiR BaithA
ताल्लुक अगर हो तो रूह
ताल्लुक अगर हो तो रूह
Vishal babu (vishu)
कुछ भी तो इस जहाँ में
कुछ भी तो इस जहाँ में
Dr fauzia Naseem shad
कुदरत
कुदरत
manisha
भीनी भीनी आ रही सुवास है।
भीनी भीनी आ रही सुवास है।
Omee Bhargava
हीर मात्रिक छंद
हीर मात्रिक छंद
Subhash Singhai
"शब्दों की सार्थकता"
Dr. Kishan tandon kranti
एक छोटा सा दर्द भी व्यक्ति के जीवन को रद्द कर सकता है एक साध
एक छोटा सा दर्द भी व्यक्ति के जीवन को रद्द कर सकता है एक साध
Rj Anand Prajapati
Loading...