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5 Jan 2023 · 1 min read

💐💐उनसे अलग कोई मर्ज़ी नहीं है💐💐

##मणिकर्णिका##
##कोई शब्द नहीं हैं##
##सब शान्त हो जाएगा##
##जहाँ चाह,वहाँ राह##

उनसे अलग कोई मर्ज़ी नहीं है,
उनसे अलग कोई मर्ज़ी नहीं है,
ठहरे रहे उनके इन्तजार में,
ख़त छोड़े खुले बहती बयार में,
उलझन तो बस उनके पलकों की थी,
तो उलझे रहे उनके दयार में,
सिवाय उनकी देहरी के कोई अर्जी नहीं है,
उनसे अलग कोई मर्ज़ी नहीं है।।1।।
वो हैं अकेले बहुत ही अकेले,
ग़र मिल भी गए तो भी अकेले,
दो शक़्ल हैं ग़र जुड़ भी गए तो,
रहेंगे तो फिर भी अकेले अकेले,
बहुत साफ़ दिल है,मेरा कोई गर्जी नहीं है,
उनसे अलग कोई मर्ज़ी नहीं है।।2।।
शायद कोई हद तय कर दी गई है,
मिलने की दूरी तय कर दी गई है,
चलो देखेंगें उनकी यह रौनक़,
यह तब भी नई थी अब भी नई है,
मिलते रहेंगे यह बे-तर्जी नहीं है,
उनसे अलग कोई मर्ज़ी नहीं है।।3।।
मैं क्यों कहूँ “आँख दुःख से भरी है”
तुम्हारे बिना यह सब दुनिया मरी है,
चलो सख़्त होकर कहो “तुम्हें छोड़ा’
‘न कह सकोगे’यही तो जादूगरी है,
“मेरा दिल है”कोई फर्जी नहीं है,
उनसे अलग कोई मर्ज़ी नहीं है।।4।।

दयार-क्षेत्र, गर्जी-स्ट्रेस,बे-तर्जी-लीक से हटकर

©®अभिषेक: पाराशरः ‘आनन्द’

Language: Hindi
131 Views
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