Sahityapedia
Login Create Account
Home
Search
Dashboard
Notifications
Settings
12 Jun 2023 · 1 min read

🏞️प्रकृति 🏞️

मानव जब धरती पर आया अपने चारों और उसने सुंदर प्रकृति को पाया।
यह देख मानव का मन खुश था हुआ प्रकृति की धीमी धीमी ठंडी ठंडी हवाओं ने था जो स्पर्श किया मानव का मन बड़ा शांत हुआ।
समय ने जब थी अपनी गति पकड़ी मानव ने भी तब करवट ली।
वह रूप दिखाया मानव ने नष्ट लगा करने हरियाली,
स्वार्थ के लिए लगा तोड़ने हर एक डाली डाली।

प्रकृति ने मानव से रो-रो कर कहा ,हमने ऐसा क्या किया हमने ,जो तुम ऐसे नष्ट कर रहे हो ऐसे तुम्हें तुमसे क्या लिया ,बदले में जन्म से मरण तक तुम्हारा साथ दिया।
मानव तुला है प्रकृति को नष्ट करने में तभी तो एक और हथियार प्रदूषण है बना रहा।

पर्यावरण में प्रदूषण ने जो है आतंक फैलाया इससे कोई भी बच ना पाया।
प्रकृति ने फिर मानव से कहा हे मानव मुझे अगर चाहते हो सुरक्षित देखना तो प्रदूषण को पड़ेगा दूर भगाना।
✍️वंदना ठाकुर ✍️

Language: Hindi
1 Like · 443 Views
📢 Stay Updated with Sahityapedia!
Join our official announcements group on WhatsApp to receive all the major updates from Sahityapedia directly on your phone.
You may also like:
डॉ निशंक बहुआयामी व्यक्तित्व शोध लेख
डॉ निशंक बहुआयामी व्यक्तित्व शोध लेख
नंदलाल मणि त्रिपाठी पीताम्बर
जलन इंसान को ऐसे खा जाती है
जलन इंसान को ऐसे खा जाती है
shabina. Naaz
"शिक्षक"
Dr Meenu Poonia
अभिनेता बनना है
अभिनेता बनना है
Jitendra kumar
स्वतंत्रता और सीमाएँ - भाग 04 Desert Fellow Rakesh Yadav
स्वतंत्रता और सीमाएँ - भाग 04 Desert Fellow Rakesh Yadav
Desert fellow Rakesh
"मीलों में नहीं"
Dr. Kishan tandon kranti
"रात का मिलन"
Ekta chitrangini
मुख  से  निकली पहली भाषा हिन्दी है।
मुख से निकली पहली भाषा हिन्दी है।
सत्य कुमार प्रेमी
ख़ास विपरीत परिस्थिति में सखा
ख़ास विपरीत परिस्थिति में सखा
सिद्धार्थ गोरखपुरी
देश-विक्रेता
देश-विक्रेता
Shekhar Chandra Mitra
हिंदी दोहा शब्द- घटना
हिंदी दोहा शब्द- घटना
राजीव नामदेव 'राना लिधौरी'
अच्छा कार्य करने वाला
अच्छा कार्य करने वाला
नेताम आर सी
कागज़ ए जिंदगी
कागज़ ए जिंदगी
Neeraj Agarwal
मित्रता तुम्हारी हमें ,
मित्रता तुम्हारी हमें ,
Yogendra Chaturwedi
मोल
मोल
विनोद वर्मा ‘दुर्गेश’
क्षितिज
क्षितिज
Dhriti Mishra
ऐसे थे पापा मेरे ।
ऐसे थे पापा मेरे ।
Kuldeep mishra (KD)
शब्द : दो
शब्द : दो
abhishek rajak
मौसम तुझको देखते ,
मौसम तुझको देखते ,
sushil sarna
*महानगर (पाँच दोहे)*
*महानगर (पाँच दोहे)*
Ravi Prakash
तुम मेरे बाद भी
तुम मेरे बाद भी
Dr fauzia Naseem shad
आप समझिये साहिब कागज और कलम की ताकत हर दुनिया की ताकत से बड़ी
आप समझिये साहिब कागज और कलम की ताकत हर दुनिया की ताकत से बड़ी
शेखर सिंह
मैं खाना खाकर तुमसे चैट करूँगा ।
मैं खाना खाकर तुमसे चैट करूँगा ।
Dr. Man Mohan Krishna
'उड़ान'
'उड़ान'
Dr. Asha Kumar Rastogi M.D.(Medicine),DTCD
तेरी ख़ामोशी
तेरी ख़ामोशी
Anju ( Ojhal )
पूस की रात
पूस की रात
Atul "Krishn"
तुम्हीं  से  मेरी   जिंदगानी  रहेगी।
तुम्हीं से मेरी जिंदगानी रहेगी।
Rituraj shivem verma
अक्षय चलती लेखनी, लिखती मन की बात।
अक्षय चलती लेखनी, लिखती मन की बात।
संजीव शुक्ल 'सचिन'
#परिहास-
#परिहास-
*Author प्रणय प्रभात*
शाखों के रूप सा हम बिखर जाएंगे
शाखों के रूप सा हम बिखर जाएंगे
कवि दीपक बवेजा
Loading...