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22 Jul 2023 · 1 min read

🌺आलस्य🌺

🌺आलस्य🌺

उम्र यौवन का
बैठा हूँ घर पर।
एक रोटी के लाले दम्पति
पश्चाताप में दो-प्रहर।।
🍃🍃🍃🍃🍃🍃
धिक्कार है मुझ पर
है आलस्य का देह।
कार्य न,कर्म कोई
न लक्ष्य से स्नेह ।।
🍃🍃🍃🍃🍃🍃
अकड़ है मुझमें
जवानी से हूँ भरा।
मुख वाचाल है
किन्तु दिये सा जलता अधमरा।।
🍃🍃🍃🍃🍃🍃
कदम पे ताले लगें हैं
हाथ में शायद पहरा।
कर्ता न कुछ काम कोई
चाल-चलन भी टेढ़ा-मेड़ा।।
🍃🍃🍃🍃🍃🍃
कर दूँ क्या-क्या
कहते-कहते शाम ढल गई।
लो अब
अमूल्य नींद भी छिन गई।।
🍃🍃🍃🍃🍃🍃
अंतड़ी सूख रही
कहतें हुए रौब में।
बांते तो राजा जैसी
भौतिकता की शौक में।।
🍃🍃🍃🍃🍃🍃
आज वो करूँ अमीर बन जाऊँ
झटके से पैसे ले आऊँ।
देश फिर सजाऊँ
दूध,केले से पेट भर
गरीबों का सेठ बन जाऊँ।।
🍃🍃🍃🍃🍃🍃
कर्म कुछ नहीं
बस सोच फुदक रही।
घर पर बैठा तन
और मन भी भटक रही।।
🍃🍃🍃🍃🍃🍃

🔥सुरेश अजगल्ले “इन्द्र”🔥

Language: Hindi
1 Like · 226 Views
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