Sahityapedia
Login Create Account
Home
Search
Dashboard
Notifications
Settings
25 Sep 2022 · 3 min read

🌈🌈प्रेम की राह पर-66🌈🌈

व्यापार की आवश्यक परिचर्चा का ज़िक्र बीते तन्हा पहरे में लिखा था।वह लाज़मी है और तुम्हारे लिए कम है।उसी सफ़ में अग्रिम सभी बातें मीठी,खट्टी और कटुता से युक्त होंगी।साधन की भेंट न चढ़ाऊँगा उन्हें क्यों कि किसी रिक्त स्थान को किसी को कष्ट देकर पूरित नहीं किया जा सकता।तो मैं किसी को भी अपने लेख से कष्ट न दूँगा।मैं तो प्रसन्नता ही बाँटने को उत्सुक रहता हूँ।तो सही मानना मैं किसी को कैसा भी कष्ट न दे सकता हूँ और मेरा हॄदय कोई लेना चाहे तो दे दूँ।परन्तु हे रूपा!तुम्हें न दूँगा।तुम्हें तो झाँकने की अनुमति मिल चुकी है।तुम झाँकती रहो और रह जाओगी।ख़ैर,कसाई कोसे बछड़ा नही मरता।यहाँ कसाई कौन है समझ जाना।तो तुम अपनी दृष्टिबाणों से भेदती रहो मेरे इस निर्मल और वासनारहित हृदय को।अपने किसी भी सूत्रधर को लगा देना और जान लेना कि यदि मैं,हाँ, मैं स्वयं वासना में डूबा होता तो यह शरीर और मुखौटा उस कालिमा को प्रतिबिम्बित करता,जिस पर समाज का हर वह व्यक्ति विनोद का आनन्द लेता जो इस चेहरे को भाँपने में पारंगत होता हैं और कह डालता उस कथन को जिसे सभी कह देते हैं कि कमज़ोर कैसे हो रहे हो।तो यह सब यहाँ फुर्र है।यह सब छोटी छोटी बातें लगतीं हैं।पर होती हैं बड़ी।यह सब संसार सागर में बहने वाली विचारों की सम्पत्ति है।लोग कहेंगे,”अशोच्यानन्वशोचित्वं प्रज्ञावादांश्च भाषसे”अर्थात जिसके लिए शोक नहीं करना चाहिए उसके लिए शोक करते हो और ज्ञानियों से वचन कहते हो।तो शोक भी वैचारिक हो तो आप स्वयं अर्जुन बनोगे और कृष्ण तो मिलेंगे ही।पर यह सब इतना सुकर कहाँ है।तो कभी संसार को ठहरकर देखो सज्जनों ऐसे मालूम पड़ेगा जैसे सागर प्रवाहित हो रहा हो और इस सागर में सब तैर रहे हैं और डूब भी रहे हैं।यह सब भक्ति के साधन है,यदि देखें तो।नहीं तो कुछ नहीं हैं।जैसे यदि आप अपनी डिग्री लेकर घर जायेंगी तो पहली बार में खोलेंगी मोदक की दुकान।एक दम घुटेमा मावा वाले मोदक।दुकान का नाम होगा, “द्विवेदी जी घुटेमा मोदक”।बादाम पिस्ता की हल्की हल्की सजावट से पगे बेसन के मोदक कौन न खाएगा।ही ही।हम तो आ ही जायेंगे।कुछ विशेष बनबाने के लिए उन लड्डुओं में।भाई मज़ा न आया।थोड़ा गोंद डालकर लड्डू बनाओ।हमें पता रहेगा कि ये फटी आँखे,ही ही, तुम्हारी क्रोधाग्नि से धधक रही हैं।तो हम तो नज़र ही नहीं मिलाएंगे।तिरछी नज़र से देखेंगे।पर आएंगे तभी जब हे रूपा!तुम।नहीं नहीं।आप बैठी होंगी।जब आप लडडू देंगी,एक किलो बादाम की ताकत एक लड्डू से ही स्वतः ही मिले जाएगी।गाँव वाले कहेंगे, लाली तो गजबै कर दिए, “कैसिन पढ़ाई किये हैं कि गाममा लड्डू बैचत रहीं” और हमारे विभागीय चचा कहते रहे उनकी लड़की तो होशियार है,तैयारी कर रही है इंद्रप्रस्थ में।पर यह क्या किया है।वहाँ यह सब पढ़ाया जाता है।तो चचा को समझाते हुए कह ही देंगे चचा मोदक खाओ और ताकत बढ़ाओ।लगे हाथों उन्हें समझाते हुए यह भी कह देंगे कि भारत में शिक्षा माने धन कमाना।चाहे मोदकों का विक्रय करो या जलेबी का। यह सब वाक़या आपके सम्मुख घटित होगा।रूपा।इन चीजों में कुछ नहीं रखा है।कि जब आप मोदकों को बड़ी शानदार और जानदार ढंग से “द्विवेदी जी मोदक”,ही ही,वाले डब्बे में पैक करेंगी।कोई बात नहीं।दिल पर मत लेना।परं तुम्हारा हृदय तो शिला है।तुम्हे क्या इस विनोद से,प्रतिफल में धूर्त ईर्ष्या का जन्म ही मिलेगा।त्राहि माम् त्राहि माम्।इस अग्नि में कौन जलना चाहेगा।पर आप,रूपा,अरे नहीं नहीं, रूपा जी,हमें न जलइयो।अब आप मालिक हैं मोदक के दुकान की।कोई बात नहीं।यदि कहीं यह मोदक प्रसिद्धि को प्राप्त हो गए।भई वाह संसार की सभी पढाईयाँ पूरी।डी.लिट तक।फिर तो फ़ोन पर आदेश आया करेंगे।सुनो हमें भी देख लेना।धन ऑनलाइन न लेके,धनादेश अर्थात मनीऑर्डर से मँगा लिया करना।कुछ हमें भी मिलजाया करेगा और आपके दर्शन का सुअवसर भी।बैठा करेंगी गुदगुदी कुर्सी पर।पास में मधुर संगीत के रूप रूप में बजती हुई जगजीत सिंह की गज़ल,”कल चौदहवीं की रात थी,शब भर रहा चर्चा तेरा,कुछ ने कहा ये चाँद है,कुछ ने कहा चेहरा तेरा” और सहसा माहौल को देखते हुए बज उठेगा,”आज रपट जाएँ तो हमें न बचइयों”।यह सब विनोद है शायद सब ऐसे ही हँसते और मुस्कुराते हुए मृत्यु का आलिंगन करें। पर यहाँ सब अपने में मशरूफ हैं।पर उस ईश्वर के यहाँ यह भी नहीं है कि,”जो ज़रा सी पी के बहक गया उसे मय-कदे से निकाल दो”।चाहे उसे मानो और न मानो,वह सब को चाहता है।पूरा पूरा।बराबर।जैसे मैं चाहता हूँ तुम्हारे मोदक।समझी रूपा।तुम्हारे लिए किस्से बनते रहेंगे।पर तुम अपने ख़्वाबों को बनाए रखना और लफ्ज़ भी।तुम मूर्ख नहीं हो,तुम चतुर हो।🌷🌷✍️✍️

©®अभिषेक पाराशर💐💐💐

Language: Hindi
65 Views
You may also like:
उम्र निकलती है जिसके होने में
उम्र निकलती है जिसके होने में
Anil Mishra Prahari
कहां छुपाऊं तुम्हें
कहां छुपाऊं तुम्हें
सुरेन्द्र शर्मा 'शिव'
समय बड़ा बलवान है भैया,जो न इसके साथ चले
समय बड़ा बलवान है भैया,जो न इसके साथ चले
सुरेश कुमार चतुर्वेदी
बिटिया दिवस
बिटिया दिवस
Ram Krishan Rastogi
किछ पन्नाके छै ई जिनगीहमरा हाथमे कलम नइँमेटाैना थमाएल गेल अछ
किछ पन्नाके छै ई जिनगीहमरा हाथमे कलम नइँमेटाैना थमाएल गेल...
गजेन्द्र गजुर ( Gajendra Gajur )
"चरित्र-दर्शन"
Dr. Kishan tandon kranti
गाँव के दुलारे
गाँव के दुलारे
जय लगन कुमार हैप्पी
चाय
चाय
डॉ प्रवीण कुमार श्रीवास्तव, प्रेम
शायरी संग्रह
शायरी संग्रह
श्याम सिंह बिष्ट
आज की प्रस्तुति: भाग 4
आज की प्रस्तुति: भाग 4
Rajeev Dutta
Tumhari khubsurat akho ne ham par kya asar kiya,
Tumhari khubsurat akho ne ham par kya asar kiya,
Sakshi Tripathi
भारत और मीडिया
भारत और मीडिया
नंदलाल मणि त्रिपाठी पीताम्बर
लिव इन रिलेशनशिप
लिव इन रिलेशनशिप
Shekhar Chandra Mitra
वो निरंतर चलता रहता है,
वो निरंतर चलता रहता है,
laxmivarma.lv
कहां है, शिक्षक का वह सम्मान जिसका वो हकदार है।
कहां है, शिक्षक का वह सम्मान जिसका वो हकदार है।
Dushyant Kumar
!! सांसें थमी सी !!
!! सांसें थमी सी !!
RAJA KUMAR 'CHOURASIA'
मातृदिवस
मातृदिवस
Dr Archana Gupta
जो बेटी गर्भ में सोई...
जो बेटी गर्भ में सोई...
आकाश महेशपुरी
■ आज का मुक्तक
■ आज का मुक्तक
*Author प्रणय प्रभात*
जिस पल में तुम ना हो।
जिस पल में तुम ना हो।
Taj Mohammad
💐प्रेम कौतुक-404💐
💐प्रेम कौतुक-404💐
शिवाभिषेक: 'आनन्द'(अभिषेक पाराशर)
ऐसा अगर नहीं होता
ऐसा अगर नहीं होता
gurudeenverma198
मां की महिमा
मां की महिमा
Shivraj Anand
बहुत दिनों से सोचा था, जाएंगे पुस्तक मेले में।
बहुत दिनों से सोचा था, जाएंगे पुस्तक मेले में।
सत्य कुमार प्रेमी
गोबरैला
गोबरैला
Satish Srijan
कहां खो गए
कहां खो गए
अभिषेक पाण्डेय ‘अभि’
तेरे हक़ में दुआ करी हमने
तेरे हक़ में दुआ करी हमने
Dr fauzia Naseem shad
*दाबे बैठे देश का, रुपया धन्ना सेठ( कुंडलिया )*
*दाबे बैठे देश का, रुपया धन्ना सेठ( कुंडलिया )*
Ravi Prakash
माँ अन्नपूर्णा
माँ अन्नपूर्णा
Shashi kala vyas
YOG KIJIYE SWASTHY LIJIYE
YOG KIJIYE SWASTHY LIJIYE
DR ARUN KUMAR SHASTRI
Loading...