Sahityapedia
Login Create Account
Home
Search
Dashboard
Notifications
Settings
19 May 2016 · 1 min read

ज़िन्दगी

दीवारों के पीछे से
बंद दरवाज़ों के बीच
हल्की सी जगह से झांकती
ज़िंदगी

मुझसे पूछती है आज
क्यों हूँ मैं बंद यहाँ
इस अँधेरे कमरे में
क्यों खुद को छुपा रखा है
ज़माने की धूप से

बेखबर
क्यों हूँ मैं कि
मुझे ना है कोई फ़िक्र
अपनी और अपनों की
क्यों हूँ अनजान दर्द से खुद के
की चला जा रहा हूँ
बिखरे कांच के टुकड़ों पर

खुश नहीं हूँ
पर ख़ुशी के रास्तों को भी नहीं जानता
ग़म को मिटने का
कोई रास्ता क्यों नहीं निकालता

रोशनी
ज़रूरी है कि मैं कुछ देख पाऊँ
खुद से बाहर निकलूँ और
फ़िज़ा महसूस कर पाऊँ
फिर निकल आये पर मेरे
इस खुले आसमान में उड़ता
आज़ाद पंछी बन जाऊं
लौट जाऊं बचपन में
इस उम्र की ज़ंजीरें तोड़
अब लगता है मन में कहीं
कि बचपन में ही खुद को छोड़ आऊं

–प्रतीक

Language: Hindi
Tag: कविता
1 Like · 388 Views
You may also like:
No one plans to fall in Love
Shivkumar Bilagrami
पिता
लक्ष्मी सिंह
इन्तेहा हो गयी
shabina. Naaz
■ कटाक्ष / आज की खोज.....
*Author प्रणय प्रभात*
आपको याद भी तो करते हैं
Dr fauzia Naseem shad
पिता
Mukesh Jeevanand
मौसम तो बस बहाना हुआ है
Kaur Surinder
एक वही मल्लाह
महावीर उत्तरांचली • Mahavir Uttranchali
कहां है
विशाल शुक्ल
समाजसेवा
Kanchan Khanna
माँ महागौरी
Vandana Namdev
ईर्ष्या
Saraswati Bajpai
*जिंदगी की जंग लड़ पाया न, कायर हो गया (हिंदी...
Ravi Prakash
" अत्याचारी युद्ध "
Dr Meenu Poonia
कितना मुझे रुलाओगे ! बस करो
D.k Math { ਧਨੇਸ਼ }
अचार का स्वाद
Buddha Prakash
✍️जुस्तजू आसमाँ की..✍️
'अशांत' शेखर
गीतायाः पाठ:।
शिवाभिषेक: 'आनन्द'(अभिषेक पाराशर)
है कौन सही है गलत क्या रक्खा इस नादानी में,
कवि गोपाल पाठक''कृष्णा''
चलना हमें होगा
Dr. Rajendra Singh 'Rahi'
हाइकु:-(राम-रावण युद्ध)
Prabhudayal Raniwal
दास्तां-ए-दर्द
Seema 'Tu hai na'
यह देश किसका?
Shekhar Chandra Mitra
गुरु महिमा
Vishnu Prasad 'panchotiya'
उलझन
Anamika Singh
रूबरू होकर जमाने से .....
लक्ष्मण 'बिजनौरी'
अत्याचार अन्याय से लड़ने, जन्मा एक सितारा था
सुरेश कुमार चतुर्वेदी
सब कुछ ही छोड़ा है तुझ पर।
Taj Mohammad
बना कुंच से कोंच,रेल-पथ विश्रामालय।।
Pt. Brajesh Kumar Nayak
“फैकबुक फ्रेंड”
DrLakshman Jha Parimal
Loading...