Sahityapedia
Login Create Account
Home
Search
Dashboard
Notifications
Settings
2 Feb 2017 · 1 min read

ग़ज़ल

बदहवासी में दरख्तों को गिराने वालो
आबे दर्या को यूँ ज़हरीला बनाने वालो
कोई हद भी तो मुकर्रर हो हवस की आखिर
रोज़ आँखों में नए ख्वाब सजाने वालो
तुम पे कुदरत का यकीनन ही सितम टूटेगा
वक़्त रहते जो नहीं चेते ज़माने वालो
हश्र क्या होगा ज़रा सोचो , नई पीढ़ी का
उनकी जन्नत को जहन्नम सा बनाने वालो
तुम ने ईसा को भी सूली पे चढ़ा डाला था
तुम ही सुकरात के कातिल हो ज़माने वालो

247 Views
📢 Stay Updated with Sahityapedia!
Join our official announcements group on WhatsApp to receive all the major updates from Sahityapedia directly on your phone.
You may also like:
*इश्क़ से इश्क़*
*इश्क़ से इश्क़*
सुरेन्द्र शर्मा 'शिव'
होली पर
होली पर
Dr.Pratibha Prakash
टूटी जिसकी देह तो, खर्चा लाखों-लाख ( कुंडलिया )
टूटी जिसकी देह तो, खर्चा लाखों-लाख ( कुंडलिया )
Ravi Prakash
3244.*पूर्णिका*
3244.*पूर्णिका*
Dr.Khedu Bharti
मैं जी रहीं हूँ, क्योंकि अभी चंद साँसे शेष है।
मैं जी रहीं हूँ, क्योंकि अभी चंद साँसे शेष है।
लक्ष्मी सिंह
बहरों तक के कान खड़े हैं,
बहरों तक के कान खड़े हैं,
*Author प्रणय प्रभात*
बेटी
बेटी
Vandna Thakur
गोविंदा श्याम गोपाला
गोविंदा श्याम गोपाला
Bodhisatva kastooriya
कोई आरज़ू नहीं थी
कोई आरज़ू नहीं थी
Dr fauzia Naseem shad
💐प्रेम कौतुक-416💐
💐प्रेम कौतुक-416💐
शिवाभिषेक: 'आनन्द'(अभिषेक पाराशर)
When the ways of this world are, but
When the ways of this world are, but
Dhriti Mishra
पतझड़ के दिन
पतझड़ के दिन
DESH RAJ
बस इतनी सी अभिलाषा मेरी
बस इतनी सी अभिलाषा मेरी
अनिल कुमार गुप्ता 'अंजुम'
वक़्त के शायरों से एक अपील
वक़्त के शायरों से एक अपील
Shekhar Chandra Mitra
अंतिम साँझ .....
अंतिम साँझ .....
sushil sarna
सफर दर-ए-यार का,दुश्वार था बहुत।
सफर दर-ए-यार का,दुश्वार था बहुत।
पूर्वार्थ
"दो पल की जिंदगी"
Yogendra Chaturwedi
" पाती जो है प्रीत की "
भगवती प्रसाद व्यास " नीरद "
देव विनायक वंदना
देव विनायक वंदना
नंदलाल मणि त्रिपाठी पीताम्बर
डिग्रियों का कभी अभिमान मत करना,
डिग्रियों का कभी अभिमान मत करना,
Ritu Verma
उधार और मानवीयता पर स्वानुभव से कुछ बात, जज्बात / DR. MUSAFIR BAITHA
उधार और मानवीयता पर स्वानुभव से कुछ बात, जज्बात / DR. MUSAFIR BAITHA
Dr MusafiR BaithA
अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस :इंस्पायर इंक्लूजन
अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस :इंस्पायर इंक्लूजन
Dr.Rashmi Mishra
कृष्ण सा हैं प्रेम मेरा
कृष्ण सा हैं प्रेम मेरा
The_dk_poetry
श्रीराम पे बलिहारी
श्रीराम पे बलिहारी
Umesh उमेश शुक्ल Shukla
राखी सांवन्त
राखी सांवन्त
DR ARUN KUMAR SHASTRI
आँगन की दीवारों से ( समीक्षा )
आँगन की दीवारों से ( समीक्षा )
डाॅ. बिपिन पाण्डेय
गरीब और बुलडोजर
गरीब और बुलडोजर
सोलंकी प्रशांत (An Explorer Of Life)
चन्द्रयान 3
चन्द्रयान 3
Jatashankar Prajapati
मैं कितना अकेला था....!
मैं कितना अकेला था....!
भवेश
अपनी बड़ाई जब स्वयं करनी पड़े
अपनी बड़ाई जब स्वयं करनी पड़े
Paras Nath Jha
Loading...