Sahityapedia
Login Create Account
Home
Search
Dashboard
Notifications
Settings
16 Jul 2016 · 1 min read

ग़ज़ल

मुख्तसर से ही सही पर फासले’ रह जाएंगे ”
गर मिजाज़ों में अना के वसवसे’ रह जाएंगे।

इश्क़ जिस दिन पहुंचेगा यारो जुनूं की हद के पार”
बोलने वालों के उस दिन लब सिले’ रह जाएंगे।

हौसलों से हम करेंगे आसमां का अब तवाफ”
क़द बुलंदी वाले अपना नापते’ रह जाएंगे।

साथ मेरे चलने को उस दम वो होंगे बेक़रार”
मुख्तसर जब ज़िन्दगी के रास्ते’ रह जाएंगे।

बाद मरने के भी तेरी जुस्तजू में जानेमन”
ये दरीचे मेरी आँखों के खुले’ रह जाएंगे।

सारी दुनियां से खुलूस ए वाहमी मिट जाएगा”
हैं मरासिम जो भी मेरे आपके’ रह जाएंगे।

कर ले तू सिंगार मेरी चाहतों के साए में”
बा खुदा हैरत से तकते आईने’ रह जाएंगे।

कितनी होगी साक़िया रुस्वाई फिर तू सोंचले”
तेरे मैखाने में गर हम बिन पिये’ रह जाएंगे।

ग़ुल चराग़ ए ज़िन्दगी होजाएगा बेशक जमील”
बाम पर यादों की कुछ रोशन दिये’ रह जाएंगे।
••••••••••••••••••••••••••••••••••••••••••

१’अना के वसवसे••घमंड भरे ख्याल।
२’ तवाफ••परिक्रमा।
३’मुख्तसर••थोड़ा/कम।
४’दरीचे••खिड़कियां।
५’खुलूसे वाहमी••आपसी मेल जोल।
६’मरासिम••दस्तूर।
७’ग़ुल चराग़••बुझा हुआ दिया।

Language: Hindi
6 Comments · 268 Views
📢 Stay Updated with Sahityapedia!
Join our official announcements group on WhatsApp to receive all the major updates from Sahityapedia directly on your phone.
You may also like:
सादगी तो हमारी जरा……देखिए
सादगी तो हमारी जरा……देखिए
shabina. Naaz
" बंदिशें ज़ेल की "
Chunnu Lal Gupta
🚩जाग्रत हिंदुस्तान चाहिए
🚩जाग्रत हिंदुस्तान चाहिए
Pt. Brajesh Kumar Nayak
इश्क़ में भी हैं बहुत, खा़र से डर लगता है।
इश्क़ में भी हैं बहुत, खा़र से डर लगता है।
सत्य कुमार प्रेमी
औकात
औकात
साहित्य गौरव
"तोल के बोल"
Dr. Kishan tandon kranti
विकास का ढिंढोरा पीटने वाले ,
विकास का ढिंढोरा पीटने वाले ,
ओनिका सेतिया 'अनु '
सदा सदाबहार हिंदी
सदा सदाबहार हिंदी
goutam shaw
शब्द
शब्द
Neeraj Agarwal
ਸੀਨੇ ਨਾਲ ਲਾਇਆ ਨਹੀਂ ਕਦੇ
ਸੀਨੇ ਨਾਲ ਲਾਇਆ ਨਹੀਂ ਕਦੇ
Surinder blackpen
"जून की शीतलता"
Dr Meenu Poonia
*चांद नहीं मेरा महबूब*
*चांद नहीं मेरा महबूब*
सुरेन्द्र शर्मा 'शिव'
एक ही तो, निशा बचा है,
एक ही तो, निशा बचा है,
विनोद कृष्ण सक्सेना, पटवारी
*बुरा न मानो होली है 【बाल कविता 】*
*बुरा न मानो होली है 【बाल कविता 】*
Ravi Prakash
2818. *पूर्णिका*
2818. *पूर्णिका*
Dr.Khedu Bharti
9. पोंथी का मद
9. पोंथी का मद
Rajeev Dutta
बुक समीक्षा
बुक समीक्षा
बिमल तिवारी “आत्मबोध”
स्वयं आएगा
स्वयं आएगा
चक्षिमा भारद्वाज"खुशी"
इंसान एक दूसरे को परखने में इतने व्यस्त थे
इंसान एक दूसरे को परखने में इतने व्यस्त थे
ruby kumari
" माटी की कहानी"
Pushpraj Anant
जालिमों तुम खोप्ते रहो सीने में खंजर
जालिमों तुम खोप्ते रहो सीने में खंजर
नील पदम् Deepak Kumar Srivastava (दीपक )(Neel Padam)
जिन्दगी ने किया मायूस
जिन्दगी ने किया मायूस
Anamika Singh
मास्टर जी का चमत्कारी डंडा🙏
मास्टर जी का चमत्कारी डंडा🙏
तारकेश्‍वर प्रसाद तरुण
अहिल्या
अहिल्या
अनूप अम्बर
राजनीतिक यात्रा फैशन में है, इमेज बिल्डिंग और फाइव स्टार सुव
राजनीतिक यात्रा फैशन में है, इमेज बिल्डिंग और फाइव स्टार सुव
Sanjay ' शून्य'
जब तुम मिलीं - एक दोस्त से सालों बाद मुलाकात होने पर ।
जब तुम मिलीं - एक दोस्त से सालों बाद मुलाकात होने पर ।
Dhriti Mishra
सारी फिज़ाएं छुप सी गई हैं
सारी फिज़ाएं छुप सी गई हैं
VINOD CHAUHAN
चयन
चयन
Dr. Pradeep Kumar Sharma
यथार्थवादी कविता के रस-तत्त्व +रमेशराज
यथार्थवादी कविता के रस-तत्त्व +रमेशराज
कवि रमेशराज
संघर्ष बिना कुछ नहीं मिलता
संघर्ष बिना कुछ नहीं मिलता
Shriyansh Gupta
Loading...