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11 Jul 2016 · 1 min read

ग़ज़ल

ख्वाब को जागकर तो कभी देखिये,
जीत को हारकर तो कभी देखिये|
*
दौलतें मांगते हैं सभी रातदिन ,
कुछ क्षमा मांगकर तो कभी देखिये |
*
लालसा की यहाँ पर उगी झाड़ियाँ
ये फसल काटकर तो कभी देखिये
*
बात सारी खरी हो जरूरी नहीं ,
बात को तोलकर तो कभी देखिये |
*
रोज ही ढूंढते सब ख़ुशी की घड़ी,
बेखुदी ढूंढ़कर तो कभी देखिये|
***
रामकिशोर उपाध्याय

Language: Hindi
Tag: कविता
1 Comment · 216 Views
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