Sahityapedia
Login Create Account
Home
Search
Write
Notifications
Wall of Fame

ग़ज़ल

क्यूँ नज़र से नज़ारे जुदा हो गये
लग रहा खुद नज़र में खुदा हो गये

इश्क़ में कर सका बस मैं इतनी वफ़ा
बेवफा से बफा , बेवफा हो गये

हैरतों में हमीं हैं कि तुम भी हो कुछ
किस लिए थे चले और क्या हो गये

हाल ख़त – ओ-किताबत जरा देखिये
रोग, पैसा , दवा औ दुआ हो गये

नींव रिश्तों की क्यूँ कर दरकने लगी
दिल के जज़्बात क्यूँ कर हवा हो गये

चीख मंदिर से लेकर के मस्जिद तलक
और क्या राह थी , ” बेजुबां” हो गये
…रविन्द्र श्रीवास्तव” बेजुबान”…..

170 Views
You may also like:
आमाल।
Taj Mohammad
प्रेयसी
Dr. Sunita Singh
कुछ लोग यूँ ही बदनाम नहीं होते...
मनोज कर्ण
दया के तुम हो सागर पापा।
Taj Mohammad
नूतन सद्आचार मिल गया
Pt. Brajesh Kumar Nayak
मन के गाँव
Anamika Singh
कला के बिना जीवन सुना ..
ओनिका सेतिया 'अनु '
हिंदी से प्यार करो
Pt. Brajesh Kumar Nayak
सितम पर सितम।
Taj Mohammad
सदियों बाद
Dr.Priya Soni Khare
नीति के दोहे
Rakesh Pathak Kathara
♡ भाई-बहन का अमूल्य रिश्ता ♡
Dr. Alpa H. Amin
✍️स्त्रोत✍️
"अशांत" शेखर
*माँ छिन्नमस्तिका 【कुंडलिया】*
Ravi Prakash
मिसाइल मैन
Anamika Singh
मकड़ी है कमाल
Buddha Prakash
कहानियां
Alok Saxena
चेतना के उच्च तरंग लहराओं रे सॉवरियाँ
Dr.sima
** बेटी की बिदाई का दर्द **
Dr. Alpa H. Amin
सरकारी निजीकरण।
Taj Mohammad
ऐ जिंदगी कितने दाँव सिखाती हैं
Dr. Alpa H. Amin
चला कर तीर नज़रों से
Ram Krishan Rastogi
दर्द की कश्ती
DESH RAJ
वो एक तुम
Saraswati Bajpai
खिला प्रसून।
Pt. Brajesh Kumar Nayak
मुझको खुद मालूम नहीं
gurudeenverma198
गणतंत्र दिवस
Aditya Prakash
मैं धरती पर नीर हूं निर्मल, जीवन मैं ही चलाता...
सुरेश कुमार चतुर्वेदी
# पिता ...
Chinta netam " मन "
लिखे आज तक
सिद्धार्थ गोरखपुरी
Loading...