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19 May 2023 · 1 min read

हिन्दी दोहा बिषय- तारे

8-
हिन्दी दोहा-बिषय- “तारे”

तारे गिन-गिन कट गई,
बैरन बिरही रात।
भोर हुए होने लगी,
बिन बादल बरसात।।
***

रजनी तो दुल्हन बनी,
पूनम की है रात।
चंदा दूल्हा है बना,
तारों की बारात।।
***

अगणित तारे दूर पर,
मिलता नहीं प्रकाश।
एक सूर्य पर्याप्त है,
जो है अपने पास।।
***
राजीव नामदेव “राना लिधौरी”
संपादक “आकांक्षा” पत्रिका
संपादक- ‘अनुश्रुति’ त्रैमासिक बुंदेली ई पत्रिका
जिलाध्यक्ष म.प्र. लेखक संघ टीकमगढ़
अध्यक्ष वनमाली सृजन केन्द्र टीकमगढ़
नई चर्च के पीछे, शिवनगर कालोनी,
टीकमगढ़ (मप्र)-472001
मोबाइल- 9893520965
Email – ranalidhori@gmail.com

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