Sahityapedia
Login Create Account
Home
Search
Dashboard
Notifications
Settings
23 Jan 2023 · 1 min read

हवा बहुत सर्द है

निकलो न बेपरवाह,
हवा बहुत सर्द है,
हो गुलाब की तरह!
नाजुक, मासूम, खूबसूरत,
महंँक बिखेरने के लिए,
सुंदर दिखने के लिए,
संस्कृति की प्रतीक!
पर समझता कौन?
अनपढ़; निरक्षर;
जिसे है, गेहूंँ की फिक्र,
भूख मिटाने की;
पेट की;
तन की;
वह तो गुलाब को
कुचलना जानता है,
मसलना जानता है,
वह दिल-ए-बेजार,
बड़ा बेदर्द है,
निकलो न बेपरवाह,
हवा बहुत सर्द है।

मौलिक व स्वरचित
©® श्री रमण ‘श्रीपद्’
बेगूसराय, (बिहार)

Language: Hindi
4 Likes · 6 Comments · 276 Views
📢 Stay Updated with Sahityapedia!
Join our official announcements group on WhatsApp to receive all the major updates from Sahityapedia directly on your phone.
Books from डॉ. श्री रमण 'श्रीपद्'
View all
You may also like:
फलों से लदे वृक्ष सब को चाहिए, पर बीज कोई बनना नहीं चाहता। क
फलों से लदे वृक्ष सब को चाहिए, पर बीज कोई बनना नहीं चाहता। क
पूर्वार्थ
उफ्फ्फ
उफ्फ्फ
Atul "Krishn"
मेरी पहली चाहत था तू
मेरी पहली चाहत था तू
Dr Manju Saini
दीवाने खाटू धाम के चले हैं दिल थाम के
दीवाने खाटू धाम के चले हैं दिल थाम के
Khaimsingh Saini
नीर क्षीर विभेद का विवेक
नीर क्षीर विभेद का विवेक
Umesh उमेश शुक्ल Shukla
क्यूट हो सुंदर हो प्यारी सी लगती
क्यूट हो सुंदर हो प्यारी सी लगती
Jitendra Chhonkar
सफ़र ए जिंदगी
सफ़र ए जिंदगी
Suman (Aditi Angel 🧚🏻)
प्यार करने वाले
प्यार करने वाले
Pratibha Pandey
!! मेरी विवशता !!
!! मेरी विवशता !!
Akash Yadav
सरस्वती माँ ज्ञान का, सबको देना दान ।
सरस्वती माँ ज्ञान का, सबको देना दान ।
जगदीश शर्मा सहज
"उजाड़"
Dr. Kishan tandon kranti
ऐसा कभी नही होगा
ऐसा कभी नही होगा
gurudeenverma198
घर के आंगन में
घर के आंगन में
Shivkumar Bilagrami
जल संरक्षण
जल संरक्षण
Preeti Karn
कर्म का फल
कर्म का फल
लक्ष्मी वर्मा प्रतीक्षा
*अज्ञानी की कलम*
*अज्ञानी की कलम*
जूनियर झनक कैलाश अज्ञानी झाँसी
बैगन के तरकारी
बैगन के तरकारी
Ranjeet Kumar
आस नहीं मिलने की फिर भी,............ ।
आस नहीं मिलने की फिर भी,............ ।
निरंजन कुमार तिलक 'अंकुर'
कितना कुछ सहती है
कितना कुछ सहती है
Shweta Soni
सफल
सफल
Paras Nath Jha
यहाँ प्रयाग न गंगासागर,
यहाँ प्रयाग न गंगासागर,
Anil chobisa
तपोवन है जीवन
तपोवन है जीवन
सुशील मिश्रा ' क्षितिज राज '
महिलाएं जितना तेजी से रो सकती है उतना ही तेजी से अपने भावनाओ
महिलाएं जितना तेजी से रो सकती है उतना ही तेजी से अपने भावनाओ
Rj Anand Prajapati
डिग्रियों का कभी अभिमान मत करना,
डिग्रियों का कभी अभिमान मत करना,
Ritu Verma
अनुभूत सत्य .....
अनुभूत सत्य .....
विमला महरिया मौज
👍👍👍
👍👍👍
*प्रणय प्रभात*
2573.पूर्णिका
2573.पूर्णिका
Dr.Khedu Bharti
*गंगा उतरीं स्वर्ग से,भागीरथ की आस (कुंडलिया)*
*गंगा उतरीं स्वर्ग से,भागीरथ की आस (कुंडलिया)*
Ravi Prakash
!!  श्री गणेशाय् नम्ः  !!
!! श्री गणेशाय् नम्ः !!
Lokesh Sharma
मैं बूढ़ा नहीं
मैं बूढ़ा नहीं
Dr. Rajeev Jain
Loading...