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10 Jul 2020 · 1 min read

हर सावन हरा नहीं होता

हर सावन हरा नहीं होता ।
हर सोना खरा नहीं होता ।।

पत्थर दिल वाली आंखों में ।
अश्रु जल भरा नहीं होता ।।

सागर में प्यासी रहे सीप ,
बस स्वाति बूँद की चाह लिये ।

चातक व्रत लेकर सहे तृषा ,
बिन प्राणों की परवाह किये ।।

विषम परिस्थिति में मन का ।
संकल्प भी डरा नहीं होता ।।

पत्थर दिल वाली आंखों में ।
अश्रु जल भरा नहीं होता ।।

फूलों का खिलना केवल ,
सौंदर्य बोध का रूप नहीं ।

अस्तित्व नहीं है छाया का ,
जब तक खिलती है धूप नहीं ।।

नव सृजन न हो पाता उर्जित ।
सपना जब मरा नहीं होता ।।

पत्थर दिल वाली आंखों में ।
अश्रु जल भरा नहीं होता ।।
✍️ सतीश शर्मा ।

Language: Hindi
1 Comment · 329 Views
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