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25 Dec 2019 · 1 min read

हरे सपने

यादों के
आगोश में
मिलन की
आस में
रात भर वो
बैठी रही द्वारे

था
सीमा पर
सपनों का
सलोना
अंधेरा ही था
राज
उसके सपनों
का
चलीं
गोलियां
बड़ी धडकनें
हुआ
कुछ
अपशगुन
हरे सपने
मासूम के

स्वलिखित
लेखक संतोष श्रीवास्तव भोपाल

Language: Hindi
189 Views
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