Sahityapedia
Login Create Account
Home
Search
Dashboard
Notifications
Settings
6 Aug 2023 · 1 min read

मित्रता दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं

हम तन्हा जब भीड़ में,रहते थे दिन रैन
करी स्वयं से दोस्ती , पाया दिल का चैन
पाया दिल का चैन,समय को भी पहचाना
जगा आत्मविश्वास, हमें आया मुस्काना
कहे ‘अर्चना ‘ बात, हौसला देते हैं ग़म
मन देता है साथ , दुखों के साथी हैं हम

डॉ अर्चना गुप्ता
मुरादाबाद

3 Likes · 2 Comments · 1513 Views
📢 Stay Updated with Sahityapedia!
Join our official announcements group on WhatsApp to receive all the major updates from Sahityapedia directly on your phone.
Books from Dr Archana Gupta
View all
You may also like:
करते रहिए भूमिकाओं का निर्वाह
करते रहिए भूमिकाओं का निर्वाह
Umesh उमेश शुक्ल Shukla
मुफ़लिसों को बांटिए खुशियां खुशी से।
मुफ़लिसों को बांटिए खुशियां खुशी से।
सत्य कुमार प्रेमी
Open mic Gorakhpur
Open mic Gorakhpur
Sandeep Albela
24/254. *छत्तीसगढ़ी पूर्णिका*
24/254. *छत्तीसगढ़ी पूर्णिका*
Dr.Khedu Bharti
अपना मन
अपना मन
Harish Chandra Pande
"अकेडमी वाला इश्क़"
Lohit Tamta
मन जो कि सूक्ष्म है। वह आसक्ति, द्वेष, इच्छा एवं काम-क्रोध ज
मन जो कि सूक्ष्म है। वह आसक्ति, द्वेष, इच्छा एवं काम-क्रोध ज
पूर्वार्थ
“गर्व करू, घमंड नहि”
“गर्व करू, घमंड नहि”
DrLakshman Jha Parimal
मौलिक विचार
मौलिक विचार
डॉ.एल. सी. जैदिया 'जैदि'
परिणति
परिणति
Shyam Sundar Subramanian
मेरी शायरी की छांव में
मेरी शायरी की छांव में
शेखर सिंह
15, दुनिया
15, दुनिया
Dr .Shweta sood 'Madhu'
वाचाल सरपत
वाचाल सरपत
आनन्द मिश्र
ईमानदार  बनना
ईमानदार बनना
तारकेश्‍वर प्रसाद तरुण
सुबह-सुबह की बात है
सुबह-सुबह की बात है
Neeraj Agarwal
■ इससे ज़्यादा कुछ नहीं शायद।।
■ इससे ज़्यादा कुछ नहीं शायद।।
*प्रणय प्रभात*
मारी - मारी फिर रही ,अब तक थी बेकार (कुंडलिया)
मारी - मारी फिर रही ,अब तक थी बेकार (कुंडलिया)
Ravi Prakash
युगों की नींद से झकझोर कर जगा दो मुझे
युगों की नींद से झकझोर कर जगा दो मुझे
अनिल कुमार गुप्ता 'अंजुम'
झाँका जो इंसान में,
झाँका जो इंसान में,
sushil sarna
टूटते उम्मीदों कि उम्मीद
टूटते उम्मीदों कि उम्मीद
नंदलाल मणि त्रिपाठी पीताम्बर
Converse with the powers
Converse with the powers
Dhriti Mishra
मैं अंधियारों से क्यों डरूँ, उम्मीद का तारा जो मुस्कुराता है
मैं अंधियारों से क्यों डरूँ, उम्मीद का तारा जो मुस्कुराता है
VINOD CHAUHAN
ज़िंदगी को
ज़िंदगी को
Dr fauzia Naseem shad
तुमसे ही दिन मेरा तुम्ही से होती रात है,
तुमसे ही दिन मेरा तुम्ही से होती रात है,
AVINASH (Avi...) MEHRA
दहेज की जरूरत नही
दहेज की जरूरत नही
भरत कुमार सोलंकी
यदि आप किसी काम को वक्त देंगे तो वह काम एक दिन आपका वक्त नही
यदि आप किसी काम को वक्त देंगे तो वह काम एक दिन आपका वक्त नही
Rj Anand Prajapati
ग़ज़ल
ग़ज़ल
Sushila joshi
बाल एवं हास्य कविता : मुर्गा टीवी लाया है।
बाल एवं हास्य कविता : मुर्गा टीवी लाया है।
Rajesh Kumar Arjun
सूर्ययान आदित्य एल 1
सूर्ययान आदित्य एल 1
Mukesh Kumar Sonkar
ସାର୍ଥକ ଜୀବନ ସୁତ୍ର
ସାର୍ଥକ ଜୀବନ ସୁତ୍ର
Bidyadhar Mantry
Loading...