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21 Jul 2023 · 1 min read

स्वप्न लोक के वासी भी जगते- सोते हैं।

स्वप्न लोक के वासी भी जगते- सोते हैं।
काबुल वाले गदहे भी हॅंसते- रोते हैं ।।
थोड़े दिन ही ख्याति किसी दानव की टिकती,
काल-गाल में बड़े – बड़े ससमय खोते हैं।।

महेश चन्द्र त्रिपाठी

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