Sahityapedia
Login Create Account
Home
Search
Dashboard
Notifications
Settings
29 Jan 2024 · 1 min read

स्वतंत्रता का अनजाना स्वाद

सदियों से….
तुम्हारी सोच के
पाषाण से
जकड़ी थी ,

और….
उसमें जकड़ना
मेरी आदत सी
बन गई थी ,

अब….
टूटी है मेरी तंद्रा
जो कुंभकरण सी
हो गई थी ,

अपना….
सब कुछ
यहाॅं तक की
नाम भी भूल गई थी ,

लेकिन….
अब जागी हूॅं
चैतन्य हो
पूर्ण रूप से ,

मैने….
चुन ली है
अपनी
जिजीविषा ,

कोई नही….
मुझ पर थोपेगा
खुद का
विचार/अधिकार ,

आखिरकार….
मैं भी चखूंगीं
स्वतंत्रता का
अनजाना स्वाद ,

ना जाने….
कहां से
भर गई है मुझमें
अपार शक्ति ,

अब मैं….
अपनी शक्ति से
पल में चूर – चूर
कर दूंगी शिला ,

जानती हूॅं….
नही हूॅं मैं
सतयुग की
अहिल्या ,

मैं हूॅं….
कलियुगी शक्ति
स्वाभिमान से भरी
नही हूॅं नारी आम ,

क्योंकि….
जानती हूॅं नहीं आयेंगें
इस युग मे मुक्त करने
मुझे प्रभु श्री राम।

स्वरचित एवं मौलिक
( ममता सिंह देवा )

1 Like · 61 Views
📢 Stay Updated with Sahityapedia!
Join our official announcements group on WhatsApp to receive all the major updates from Sahityapedia directly on your phone.
Books from Mamta Singh Devaa
View all
You may also like:
तुम-सम बड़ा फिर कौन जब, तुमको लगे जग खाक है?
तुम-सम बड़ा फिर कौन जब, तुमको लगे जग खाक है?
Pt. Brajesh Kumar Nayak
बढ़ी शय है मुहब्बत
बढ़ी शय है मुहब्बत
shabina. Naaz
जिंदगी सभी के लिए एक खुली रंगीन किताब है
जिंदगी सभी के लिए एक खुली रंगीन किताब है
Rituraj shivem verma
सम्मान
सम्मान
Dr. Pradeep Kumar Sharma
रविवार की छुट्टी
रविवार की छुट्टी
सोलंकी प्रशांत (An Explorer Of Life)
जिसे तुम ढूंढती हो
जिसे तुम ढूंढती हो
Basant Bhagawan Roy
पुरुषो को प्रेम के मायावी जाल में फसाकर , उनकी कमौतेजन्न बढ़
पुरुषो को प्रेम के मायावी जाल में फसाकर , उनकी कमौतेजन्न बढ़
पूर्वार्थ
"सफर"
Yogendra Chaturwedi
सत्य की खोज
सत्य की खोज
Shyam Sundar Subramanian
वो ही तो यहाँ बदनाम प्यार को करते हैं
वो ही तो यहाँ बदनाम प्यार को करते हैं
gurudeenverma198
मैं तो महज जीवन हूँ
मैं तो महज जीवन हूँ
VINOD CHAUHAN
भीष्म के उत्तरायण
भीष्म के उत्तरायण
Shaily
"Awakening by the Seashore"
Manisha Manjari
*जय सियाराम राम राम राम...*
*जय सियाराम राम राम राम...*
Harminder Kaur
“ प्रेमक बोल सँ लोक केँ जीत सकैत छी ”
“ प्रेमक बोल सँ लोक केँ जीत सकैत छी ”
DrLakshman Jha Parimal
Ranjeet Shukla
Ranjeet Shukla
Ranjeet Kumar Shukla
20-चेहरा हर सच बता नहीं देता
20-चेहरा हर सच बता नहीं देता
Ajay Kumar Vimal
मैं को तुम
मैं को तुम
Dr fauzia Naseem shad
जब कोई हाथ और साथ दोनों छोड़ देता है
जब कोई हाथ और साथ दोनों छोड़ देता है
Ranjeet kumar patre
ना कुछ जवाब देती हो,
ना कुछ जवाब देती हो,
Dr. Man Mohan Krishna
3320.⚘ *पूर्णिका* ⚘
3320.⚘ *पूर्णिका* ⚘
Dr.Khedu Bharti
--बेजुबान का दर्द --
--बेजुबान का दर्द --
गायक - लेखक अजीत कुमार तलवार
गुरुवर
गुरुवर
डॉ०छोटेलाल सिंह 'मनमीत'
धर्म और संस्कृति
धर्म और संस्कृति
Bodhisatva kastooriya
*चुनावी कुंडलिया*
*चुनावी कुंडलिया*
Ravi Prakash
देखिए
देखिए "औरत चाहना" और "औरत को चाहना"
शेखर सिंह
मस्जिद से अल्लाह का एजेंट भोंपू पर बोल रहा है
मस्जिद से अल्लाह का एजेंट भोंपू पर बोल रहा है
Dr MusafiR BaithA
■ आज का शेर शुभ-रात्रि के साथ।
■ आज का शेर शुभ-रात्रि के साथ।
*Author प्रणय प्रभात*
जन्मदिन तुम्हारा!
जन्मदिन तुम्हारा!
bhandari lokesh
धीरे धीरे बदल रहा
धीरे धीरे बदल रहा
Umesh उमेश शुक्ल Shukla
Loading...