Sahityapedia
Login Create Account
Home
Search
Write
Notifications
Wall of Fame
Jun 13, 2016 · 1 min read

स्लेट-बत्ती सी जिन्दगी

होती जिन्दगी स्लेट-बत्ती सी तो जीना कितना आसान होता।
गलती होते ही मिटा देते
सही करके दिखा देते
धुंधली होती स्लेट तो नल के नीचे धो लेते
चलती ना कोई बत्ती तो पानी में भिगो लेते
होता सब साफ सुथरा काट छाट का ना निशान होता
होती जिन्दगी स्लेट-बत्ती सी तो जीना कितना आसान होता।

2 Comments · 508 Views
You may also like:
भावों उर्मियाँ ( कुंडलिया संग्रह)
डाॅ. बिपिन पाण्डेय
सोने की दस अँगूठियाँ….
Piyush Goel
इन नजरों के वार से बचना है।
Taj Mohammad
*देखने लायक नैनीताल (गीत)*
Ravi Prakash
तेरे दिल में कोई साजिश तो नहीं
Krishan Singh
लांगुरिया
Subhash Singhai
जब हम छोटे बच्चे थे ।
Saraswati Bajpai
इश्क के मारे है।
Taj Mohammad
कन्यादान क्यों और किसलिए [भाग८]
Anamika Singh
** तक़दीर की रेखाएँ **
Dr. Alpa H. Amin
ढाई आखर प्रेम का
श्री रमण
कुत्ते भौंक रहे हैं हाथी निज रस चलता जाता
Pt. Brajesh Kumar Nayak
मैं हो गई पराई.....
Dr. Alpa H. Amin
*योग (कुंडलिया)*
Ravi Prakash
भारत के इतिहास में मुरादाबाद का स्थान
Ravi Prakash
जल है जीवन में आधार
Mahender Singh Hans
गुरु तेग बहादुर जी
सुरेश कुमार चतुर्वेदी
पूनम की रात में चांद व चांदनी
Ram Krishan Rastogi
जिन्दगी है की अब सम्हाली ही नहीं जाती है ।
Buddha Prakash
एहसासों का समन्दर लिए बैठा हूं।
Taj Mohammad
नामालूम था नादान को।
Taj Mohammad
सच
अंजनीत निज्जर
दुनिया की फ़ितरत
Anamika Singh
पिता की व्यथा
मनोज कर्ण
श्रमिक जो हूँ मैं तो...
मनोज कर्ण
युवता
Vijaykumar Gundal
✍️स्टेचू✍️
"अशांत" शेखर
चिराग जलाए नहीं
शेख़ जाफ़र खान
एक दौर था हम भी आशिक हुआ करते थे
Krishan Singh
एक वीरांगना का अन्त !
Prabhudayal Raniwal
Loading...