Sahityapedia
Login Create Account
Home
Search
Dashboard
Notifications
Settings
7 Feb 2024 · 1 min read

सोना जेवर बनता है, तप जाने के बाद।

सोना जेवर बनता है, तप जाने के बाद।
मानव भी संभलता है, ठोकर खाने के बाद।।
हथेली पर सरसों हरी नहीं होती,
हिना रंग लाती है दोस्त!
सूख जाने के बाद।।

आर. एस. ‘प्रीतम’

2 Likes · 441 Views
📢 Stay Updated with Sahityapedia!
Join our official announcements group on WhatsApp to receive all the major updates from Sahityapedia directly on your phone.
Books from आर.एस. 'प्रीतम'
View all
You may also like:
The Moon!
The Moon!
Buddha Prakash
मैं भारत हूं
मैं भारत हूं
Ms.Ankit Halke jha
I hope one day the clouds will be gone, and the bright sun will rise.
I hope one day the clouds will be gone, and the bright sun will rise.
Manisha Manjari
जंगल की होली
जंगल की होली
Dr Archana Gupta
“गुरुर मत करो”
“गुरुर मत करो”
Virendra kumar
मंजिल-ए-मोहब्बत
मंजिल-ए-मोहब्बत
Dr. Akhilesh Baghel "Akhil"
सालगिरह
सालगिरह
अंजनीत निज्जर
बूढ़ा बरगद का पेड़ बोला (मार्मिक कविता)
बूढ़ा बरगद का पेड़ बोला (मार्मिक कविता)
Dr. Kishan Karigar
*सपनों का बादल*
*सपनों का बादल*
Poonam Matia
"गौरतलब"
Dr. Kishan tandon kranti
कहां बिखर जाती है
कहां बिखर जाती है
प्रकाश जुयाल 'मुकेश'
"काहे का स्नेह मिलन"
Dr Meenu Poonia
एक अच्छी जिंदगी जीने के लिए पढ़ाई के सारे कोर्स करने से अच्छा
एक अच्छी जिंदगी जीने के लिए पढ़ाई के सारे कोर्स करने से अच्छा
Dr. Man Mohan Krishna
Quote
Quote
अनिल कुमार गुप्ता 'अंजुम'
Ranjeet Shukla
Ranjeet Shukla
Ranjeet Kumar Shukla
ज़िंदगी
ज़िंदगी
Dr. Seema Varma
थोड़ा विश्राम चाहता हू,
थोड़ा विश्राम चाहता हू,
Umender kumar
रमेशराज के दो मुक्तक
रमेशराज के दो मुक्तक
कवि रमेशराज
वृक्ष किसी को
वृक्ष किसी को
DrLakshman Jha Parimal
स्त्री:-
स्त्री:-
Vivek Mishra
डॉ अरुण कुमार शास्त्री
डॉ अरुण कुमार शास्त्री
DR ARUN KUMAR SHASTRI
ज़िदगी के फ़लसफ़े
ज़िदगी के फ़लसफ़े
Shyam Sundar Subramanian
2913.*पूर्णिका*
2913.*पूर्णिका*
Dr.Khedu Bharti
*सावन झूला मेघ पर ,नारी का अधिकार (कुंडलिया)*
*सावन झूला मेघ पर ,नारी का अधिकार (कुंडलिया)*
Ravi Prakash
■ सामयिक आलेख-
■ सामयिक आलेख-
*Author प्रणय प्रभात*
अनुराग
अनुराग
Sanjay ' शून्य'
अजीब होता है बुलंदियों का सबब
अजीब होता है बुलंदियों का सबब
कवि दीपक बवेजा
कितना सकून है इन , इंसानों  की कब्र पर आकर
कितना सकून है इन , इंसानों की कब्र पर आकर
श्याम सिंह बिष्ट
उसे लगता है कि
उसे लगता है कि
Keshav kishor Kumar
महसूस कर रही हूँ बेरंग ख़ुद को मैं
महसूस कर रही हूँ बेरंग ख़ुद को मैं
Neelam Sharma
Loading...