Sahityapedia
Login Create Account
Home
Search
Dashboard
Notifications
Settings
11 Feb 2024 · 1 min read

सूर्य देव

सूर्य देव के आलोक से पुलकित ये संसार!
पशु-पक्षी, नर-नारी, बच्चे-बूढे,वृद्ध, लाचार!!
तन-मन सब प्रमुदित पा कर आपकी ऊर्जा,
आप ही हो चराचर जगत के जीवन आधार!!

90 Views
📢 Stay Updated with Sahityapedia!
Join our official announcements group on WhatsApp to receive all the major updates from Sahityapedia directly on your phone.
Books from Bodhisatva kastooriya
View all
You may also like:
कलम व्याध को बेच चुके हो न्याय भला लिक्खोगे कैसे?
कलम व्याध को बेच चुके हो न्याय भला लिक्खोगे कैसे?
संजीव शुक्ल 'सचिन'
आपकी वजह से किसी को दर्द ना हो
आपकी वजह से किसी को दर्द ना हो
Aarti sirsat
रात
रात
SHAMA PARVEEN
ये तो दुनिया है यहाँ लोग बदल जाते है
ये तो दुनिया है यहाँ लोग बदल जाते है
shabina. Naaz
"कोढ़े की रोटी"
Dr. Kishan tandon kranti
क्या सोचूं मैं तेरे बारे में
क्या सोचूं मैं तेरे बारे में
gurudeenverma198
दुखद अंत 🐘
दुखद अंत 🐘
Rajni kapoor
इमारत बड़ी थी वो
इमारत बड़ी थी वो
नील पदम् Deepak Kumar Srivastava (दीपक )(Neel Padam)
यार
यार
अखिलेश 'अखिल'
आप मुझको
आप मुझको
Dr fauzia Naseem shad
सलाह .... लघुकथा
सलाह .... लघुकथा
sushil sarna
"विचित्रे खलु संसारे नास्ति किञ्चिन्निरर्थकम् ।
Mukul Koushik
प्रकृति ने अंँधेरी रात में चांँद की आगोश में अपने मन की सुंद
प्रकृति ने अंँधेरी रात में चांँद की आगोश में अपने मन की सुंद
Neerja Sharma
आसान नही सिर्फ सुनके किसी का किरदार आंकना
आसान नही सिर्फ सुनके किसी का किरदार आंकना
Kumar lalit
गांव
गांव
नंदलाल मणि त्रिपाठी पीताम्बर
सूना आज चमन...
सूना आज चमन...
डॉ.सीमा अग्रवाल
है कुछ पर कुछ बताया जा रहा है।।
है कुछ पर कुछ बताया जा रहा है।।
सत्य कुमार प्रेमी
रामचरितमानस दर्शन : एक पठनीय समीक्षात्मक पुस्तक
रामचरितमानस दर्शन : एक पठनीय समीक्षात्मक पुस्तक
Ravi Prakash
3128.*पूर्णिका*
3128.*पूर्णिका*
Dr.Khedu Bharti
पहचान
पहचान
Dr. Pradeep Kumar Sharma
गीतिका छंद
गीतिका छंद
Seema Garg
लाख़ ज़ख्म हो दिल में,
लाख़ ज़ख्म हो दिल में,
पूर्वार्थ
तन्हाई
तन्हाई
Dr. Ramesh Kumar Nirmesh
गम के बगैर
गम के बगैर
Swami Ganganiya
सांवली हो इसलिए सुंदर हो
सांवली हो इसलिए सुंदर हो
Aman Kumar Holy
ग़ज़ल
ग़ज़ल
ईश्वर दयाल गोस्वामी
ज़िंदगानी
ज़िंदगानी
Shyam Sundar Subramanian
उल्लू नहीं है पब्लिक जो तुम उल्लू बनाते हो, बोल-बोल कर अपना खिल्ली उड़ाते हो।
उल्लू नहीं है पब्लिक जो तुम उल्लू बनाते हो, बोल-बोल कर अपना खिल्ली उड़ाते हो।
Anand Kumar
श्री राम एक मंत्र है श्री राम आज श्लोक हैं
श्री राम एक मंत्र है श्री राम आज श्लोक हैं
Shankar N aanjna
पर्यावरण है तो सब है
पर्यावरण है तो सब है
Amrit Lal
Loading...