Sahityapedia
Login Create Account
Home
Search
Dashboard
Notifications
Settings
21 Aug 2023 · 1 min read

सुन्दर तन तब जानिये,

सुन्दर तन तब जानिये,
मन भी सुन्दर होय,
मन में कपट कुलांचता,
तन भी बोझिल होय ।

नील पदम्

5 Likes · 171 Views
📢 Stay Updated with Sahityapedia!
Join our official announcements group on WhatsApp to receive all the major updates from Sahityapedia directly on your phone.
Books from नील पदम् Deepak Kumar Srivastava (दीपक )(Neel Padam)
View all
You may also like:
मेरी गुड़िया
मेरी गुड़िया
Kanchan Khanna
■ शुभ धन-तेरस।।
■ शुभ धन-तेरस।।
*Author प्रणय प्रभात*
मकर संक्रांति पर्व
मकर संक्रांति पर्व
Seema gupta,Alwar
जल प्रदूषण दुःख की है खबर
जल प्रदूषण दुःख की है खबर
Buddha Prakash
ग़ज़ल
ग़ज़ल
Mahendra Narayan
पहाड़ों की हंसी ठिठोली
पहाड़ों की हंसी ठिठोली
Shankar N aanjna
सोचके बत्तिहर बुत्ताएल लोकके व्यवहार अंधा होइछ, ढल-फुँनगी पर
सोचके बत्तिहर बुत्ताएल लोकके व्यवहार अंधा होइछ, ढल-फुँनगी पर
Dinesh Yadav (दिनेश यादव)
"अपराध का ग्राफ"
Dr. Kishan tandon kranti
फागुन आया झूमकर, लगा सताने काम।
फागुन आया झूमकर, लगा सताने काम।
महेश चन्द्र त्रिपाठी
अब बहुत हुआ बनवास छोड़कर घर आ जाओ बनवासी।
अब बहुत हुआ बनवास छोड़कर घर आ जाओ बनवासी।
Prabhu Nath Chaturvedi "कश्यप"
ग़ज़ल/नज़्म - उसकी तो बस आदत थी मुस्कुरा कर नज़र झुकाने की
ग़ज़ल/नज़्म - उसकी तो बस आदत थी मुस्कुरा कर नज़र झुकाने की
अनिल कुमार
अहमियत 🌹🙏
अहमियत 🌹🙏
तारकेश्‍वर प्रसाद तरुण
*अध्यापिका
*अध्यापिका
Naushaba Suriya
बेवफाई मुझसे करके तुम
बेवफाई मुझसे करके तुम
gurudeenverma198
नारी
नारी
Dr Archana Gupta
*पैसा ज्यादा है बुरा, लाता सौ-सौ रोग*【*कुंडलिया*】
*पैसा ज्यादा है बुरा, लाता सौ-सौ रोग*【*कुंडलिया*】
Ravi Prakash
है हार तुम्ही से जीत मेरी,
है हार तुम्ही से जीत मेरी,
कृष्णकांत गुर्जर
सावन का महीना है भरतार
सावन का महीना है भरतार
Ram Krishan Rastogi
मानस हंस छंद
मानस हंस छंद
Subhash Singhai
Ghazal
Ghazal
shahab uddin shah kannauji
ये आँखें तेरे आने की उम्मीदें जोड़ती रहीं
ये आँखें तेरे आने की उम्मीदें जोड़ती रहीं
Kailash singh
23/67.*छत्तीसगढ़ी पूर्णिका*
23/67.*छत्तीसगढ़ी पूर्णिका*
Dr.Khedu Bharti
एक तरफा प्यार
एक तरफा प्यार
Neeraj Agarwal
इत्तिफ़ाक़न मिला नहीं होता।
इत्तिफ़ाक़न मिला नहीं होता।
सत्य कुमार प्रेमी
हे आशुतोष !
हे आशुतोष !
Umesh उमेश शुक्ल Shukla
क्या खोकर ग़म मनाऊ, किसे पाकर नाज़ करूँ मैं,
क्या खोकर ग़म मनाऊ, किसे पाकर नाज़ करूँ मैं,
Chandrakant Sahu
कुछ लोग तुम्हारे हैं यहाँ और कुछ लोग हमारे हैं /लवकुश यादव
कुछ लोग तुम्हारे हैं यहाँ और कुछ लोग हमारे हैं /लवकुश यादव "अज़ल"
लवकुश यादव "अज़ल"
फ़ेसबुक पर पिता दिवस / मुसाफ़िर बैठा
फ़ेसबुक पर पिता दिवस / मुसाफ़िर बैठा
Dr MusafiR BaithA
जो हुआ वो गुज़रा कल था
जो हुआ वो गुज़रा कल था
Atul "Krishn"
"" *प्रताप* ""
सुनीलानंद महंत
Loading...