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30 Jun 2023 · 1 min read

साज सजाए बैठा जग के, सच से हो अंजान।

साज सजाए बैठा जग के, सच से हो अंजान।
हिंसा के पथ पर चल करता, अपना ही नुकसान।
सबमें निज को निज में सबको, देख मनुज नादान।
किस खातिर ये पाँव पसारा, ले फिर ये संज्ञान।

© सीमा अग्रवाल

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