Sahityapedia
Login Create Account
Home
Search
Dashboard
Notifications
Settings
19 Dec 2022 · 1 min read

समय देकर तो देखो

समय देकर तो देखो
शायद सब कुछ ठीक हो जाए
पुराने-कड़वे रिश्तों में
शायद थोड़ी-सी मिठास भर आए।
दुश्मनी की मशालों में आग
शायद थोड़ी कम हो जाए।
भटके हुए मुसाफिरों को
राह कोई ठीक मिल जाए।
समय देकर तो देखो
शायद सब कुछ ठीक हो जाए।
ज़िन्दगी में आई मुश्किलों का
शायद कोई हल मिल जाए।
पीढ़ियों के बीच बनी है जो खाई
शायद वो भी आसानी से भर जाए।
टूटे हुए दिलों को भी
शायद कोई मरहम मिल जाए।
समय देकर तो देखो
शायद सब कुछ ठीक हो जाए।

Language: Hindi
4 Likes · 1 Comment · 280 Views
📢 Stay Updated with Sahityapedia!
Join our official announcements group on WhatsApp to receive all the major updates from Sahityapedia directly on your phone.
You may also like:
महंगाई
महंगाई
Surinder blackpen
उधार और मानवीयता पर स्वानुभव से कुछ बात, जज्बात / DR. MUSAFIR BAITHA
उधार और मानवीयता पर स्वानुभव से कुछ बात, जज्बात / DR. MUSAFIR BAITHA
Dr MusafiR BaithA
मेरी ख़्वाहिश वफ़ा सुन ले,
मेरी ख़्वाहिश वफ़ा सुन ले,
अनिल अहिरवार"अबीर"
" तुम से नज़र मिलीं "
Aarti sirsat
💐प्रेम कौतुक-369💐
💐प्रेम कौतुक-369💐
शिवाभिषेक: 'आनन्द'(अभिषेक पाराशर)
सपनों का राजकुमार
सपनों का राजकुमार
Dr. Pradeep Kumar Sharma
देश अनेक
देश अनेक
Santosh Shrivastava
तेरा फिक्र
तेरा फिक्र
Basant Bhagawan Roy
इश्क़ में कोई
इश्क़ में कोई
लक्ष्मी सिंह
ग़ज़ल सगीर
ग़ज़ल सगीर
डॉ सगीर अहमद सिद्दीकी Dr SAGHEER AHMAD
ज्ञात हो
ज्ञात हो
Dr fauzia Naseem shad
लटकते ताले
लटकते ताले
Kanchan Khanna
*दफ्तर बाबू फाइलें,अफसर मालामाल 【हिंदी गजल/दोहा गीतिका】*
*दफ्तर बाबू फाइलें,अफसर मालामाल 【हिंदी गजल/दोहा गीतिका】*
Ravi Prakash
#अद्भुत_प्रसंग
#अद्भुत_प्रसंग
*Author प्रणय प्रभात*
न जाने कहा‌ँ दोस्तों की महफीले‌ं खो गई ।
न जाने कहा‌ँ दोस्तों की महफीले‌ं खो गई ।
Yogendra Chaturwedi
R J Meditation Centre
R J Meditation Centre
Ravikesh Jha
मां बाप के प्यार जैसा  कहीं कुछ और नहीं,
मां बाप के प्यार जैसा कहीं कुछ और नहीं,
Satish Srijan
ख़ुद्दार बन रहे हैं पर लँगड़ा रहा ज़मीर है
ख़ुद्दार बन रहे हैं पर लँगड़ा रहा ज़मीर है
पूर्वार्थ
"दोस्ती का मतलब"
Radhakishan R. Mundhra
वो तो है ही यहूद
वो तो है ही यहूद
shabina. Naaz
बाल एवं हास्य कविता: मुर्गा टीवी लाया है।
बाल एवं हास्य कविता: मुर्गा टीवी लाया है।
Rajesh Kumar Arjun
जगत का हिस्सा
जगत का हिस्सा
Harish Chandra Pande
जिंदगी का सवेरा
जिंदगी का सवेरा
Dr. Man Mohan Krishna
बन गए हम तुम्हारी याद में, कबीर सिंह
बन गए हम तुम्हारी याद में, कबीर सिंह
The_dk_poetry
पंचशील गीत
पंचशील गीत
Buddha Prakash
फितरत अमिट जन एक गहना
फितरत अमिट जन एक गहना
तारकेश्‍वर प्रसाद तरुण
हाँ बहुत प्रेम करती हूँ तुम्हें
हाँ बहुत प्रेम करती हूँ तुम्हें
Saraswati Bajpai
हूं बहारों का मौसम
हूं बहारों का मौसम
साहित्य गौरव
शायरी - गुल सा तू तेरा साथ ख़ुशबू सा - संदीप ठाकुर
शायरी - गुल सा तू तेरा साथ ख़ुशबू सा - संदीप ठाकुर
Sandeep Thakur
आ गई रंग रंगीली, पंचमी आ गई रंग रंगीली
आ गई रंग रंगीली, पंचमी आ गई रंग रंगीली
सुरेश कुमार चतुर्वेदी
Loading...