Sahityapedia
Login Create Account
Home
Search
Dashboard
Notifications
Settings
18 Feb 2023 · 1 min read

💐अज्ञात के प्रति-154💐(प्रेम कौतुक-154)

सब पेश-ओ-पस में हम क्यों न हों,
नज़र और दिल की लगाम थामे कौन है।

पेश-ओ-पस-असमंजस में

©®अभिषेक: पाराशरः “आनन्द”

Language: Hindi
207 Views
📢 Stay Updated with Sahityapedia!
Join our official announcements group on WhatsApp to receive all the major updates from Sahityapedia directly on your phone.
You may also like:
*यह दौर गजब का है*
*यह दौर गजब का है*
Harminder Kaur
"वक्त-वक्त की बात"
Dr. Kishan tandon kranti
नयी - नयी लत लगी है तेरी
नयी - नयी लत लगी है तेरी
सिद्धार्थ गोरखपुरी
कलरव करते भोर में,
कलरव करते भोर में,
sushil sarna
लोगो का व्यवहार
लोगो का व्यवहार
Ranjeet kumar patre
* काव्य रचना *
* काव्य रचना *
surenderpal vaidya
2952.*पूर्णिका*
2952.*पूर्णिका*
Dr.Khedu Bharti
" यहाँ कई बेताज हैं "
भगवती प्रसाद व्यास " नीरद "
फर्क तो पड़ता है
फर्क तो पड़ता है
Dr. Pradeep Kumar Sharma
आवारापन एक अमरबेल जैसा जब धीरे धीरे परिवार, समाज और देश रूपी
आवारापन एक अमरबेल जैसा जब धीरे धीरे परिवार, समाज और देश रूपी
Sanjay ' शून्य'
बेटा बेटी है एक समान,
बेटा बेटी है एक समान,
Rituraj shivem verma
बम से दुश्मन मार गिराए( बाल कविता )
बम से दुश्मन मार गिराए( बाल कविता )
Ravi Prakash
अब किसका है तुमको इंतजार
अब किसका है तुमको इंतजार
gurudeenverma198
ऐसी गुस्ताखी भरी नजर से पता नहीं आपने कितनों के दिलों का कत्
ऐसी गुस्ताखी भरी नजर से पता नहीं आपने कितनों के दिलों का कत्
Chahat
निर्वात का साथी🙏
निर्वात का साथी🙏
तारकेश्‍वर प्रसाद तरुण
सीने पर थीं पुस्तकें, नैना रंग हजार।
सीने पर थीं पुस्तकें, नैना रंग हजार।
Suryakant Dwivedi
अतीत के पन्ने (कविता)
अतीत के पन्ने (कविता)
Monika Yadav (Rachina)
दर्द
दर्द
SHAMA PARVEEN
पुरखों के गांव
पुरखों के गांव
Mohan Pandey
आलोचक सबसे बड़े शुभचिंतक
आलोचक सबसे बड़े शुभचिंतक
Paras Nath Jha
Ishq ke panne par naam tera likh dia,
Ishq ke panne par naam tera likh dia,
Chinkey Jain
समय और स्त्री
समय और स्त्री
Madhavi Srivastava
जो मेरा है... वो मेरा है
जो मेरा है... वो मेरा है
Sonam Puneet Dubey
शब्द
शब्द
Ajay Mishra
चौमासा विरहा
चौमासा विरहा
लक्ष्मी सिंह
बाल कविता: मोर
बाल कविता: मोर
Rajesh Kumar Arjun
आखिरी दिन होगा वो
आखिरी दिन होगा वो
shabina. Naaz
वृक्षारोपण का अर्थ केवल पौधे को रोपित करना ही नहीं बल्कि उसक
वृक्षारोपण का अर्थ केवल पौधे को रोपित करना ही नहीं बल्कि उसक
ओम प्रकाश श्रीवास्तव
तड़प कर मर रही हूं तुझे ही पाने के लिए
तड़प कर मर रही हूं तुझे ही पाने के लिए
Ram Krishan Rastogi
घर को छोड़कर जब परिंदे उड़ जाते हैं,
घर को छोड़कर जब परिंदे उड़ जाते हैं,
शेखर सिंह
Loading...