Sahityapedia
Login Create Account
Home
Search
Dashboard
Notifications
Settings
11 Oct 2022 · 1 min read

सबतै बढिया खेलणा

मेरी कविता का हरियाणवी अनुवाद
अनुवादक -पवन गहलोत

सबतै बढिया खेलणा

बाळकपण म्हं
मेरे ढब्बी
माड़ी सी बी
नोक-झोंक होण पै
मेरा जी दुखाण तई
तोड़ दिया करै थे
मेरे माट्टी के खेलणे
फेर आज-काल के ढब्बी
होत्ते ए
थोड़ी-सी नोक-झोंक
तोड़ दे सैं, दिल नै ए
दीक्खै आज-काल
यो ए सै
सबतै बढिया खेलणा।

– विनोद सिल्ला

(अनुवाद – पवन गहलोत )

1 Like · 217 Views
📢 Stay Updated with Sahityapedia!
Join our official announcements group on WhatsApp to receive all the major updates from Sahityapedia directly on your phone.
You may also like:
एक दिवानी को हुआ, दीवाने  से  प्यार ।
एक दिवानी को हुआ, दीवाने से प्यार ।
sushil sarna
हल
हल
विनोद वर्मा ‘दुर्गेश’
*तेरी याद*
*तेरी याद*
सुरेन्द्र शर्मा 'शिव'
14- वसुधैव कुटुम्ब की, गरिमा बढाइये
14- वसुधैव कुटुम्ब की, गरिमा बढाइये
Ajay Kumar Vimal
@ranjeetkrshukla
@ranjeetkrshukla
Ranjeet Kumar Shukla
■ मिसाल अटारी-वाघा बॉर्डर दे ही चुका है। रोज़ की तरह आज भी।।
■ मिसाल अटारी-वाघा बॉर्डर दे ही चुका है। रोज़ की तरह आज भी।।
*प्रणय प्रभात*
सर सरिता सागर
सर सरिता सागर
ओमप्रकाश भारती *ओम्*
बहुत हुआ
बहुत हुआ
Mahender Singh
विचार
विचार
अनिल कुमार गुप्ता 'अंजुम'
तुम्हारे लिए
तुम्हारे लिए
हिमांशु Kulshrestha
Anand mantra
Anand mantra
Rj Anand Prajapati
गुरु रामदास
गुरु रामदास
कवि रमेशराज
सत्य तत्व है जीवन का खोज
सत्य तत्व है जीवन का खोज
Buddha Prakash
*अगवा कर लिया है सूरज को बादलों ने...,*
*अगवा कर लिया है सूरज को बादलों ने...,*
AVINASH (Avi...) MEHRA
हयात कैसे कैसे गुल खिला गई
हयात कैसे कैसे गुल खिला गई
Shivkumar Bilagrami
#शिवाजी_के_अल्फाज़
#शिवाजी_के_अल्फाज़
Abhishek Shrivastava "Shivaji"
*कर्मफल सिद्धांत*
*कर्मफल सिद्धांत*
Shashi kala vyas
चाहत
चाहत
Sûrëkhâ
सौंदर्य छटा🙏
सौंदर्य छटा🙏
तारकेश्‍वर प्रसाद तरुण
हर दफ़ा जब बात रिश्तों की आती है तो इतना समझ आ जाता है की ये
हर दफ़ा जब बात रिश्तों की आती है तो इतना समझ आ जाता है की ये
पूर्वार्थ
"बहरापन"
Dr. Kishan tandon kranti
3371⚘ *पूर्णिका* ⚘
3371⚘ *पूर्णिका* ⚘
Dr.Khedu Bharti
तिरंगा
तिरंगा
Dr. Pradeep Kumar Sharma
सारे जग को मानवता का पाठ पढ़ा कर चले गए...
सारे जग को मानवता का पाठ पढ़ा कर चले गए...
Sunil Suman
फागुन
फागुन
Punam Pande
पग बढ़ाते चलो
पग बढ़ाते चलो
surenderpal vaidya
धर्म जब पैदा हुआ था
धर्म जब पैदा हुआ था
शेखर सिंह
*प्रेम भेजा  फ्राई है*
*प्रेम भेजा फ्राई है*
सुखविंद्र सिंह मनसीरत
1. चाय
1. चाय
Rajeev Dutta
स्वच्छ देश अभियान में( बाल कविता)
स्वच्छ देश अभियान में( बाल कविता)
Ravi Prakash
Loading...