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20 Aug 2023 · 1 min read

सबक ज़िंदगी पग-पग देती, इसके खेल निराले हैं।

सबक ज़िंदगी पग-पग देती, इसके खेल निराले हैं।
कभी ख़ुशी कभी दिखाए ग़म, रंग सभी मतवाले हैं।।
इंद्रधनुष-सी कभी ज़िंदगी, बदरंग कभी लगती है।
पल में शोला पल में शबनम, कितने ढंग बदलती है।।

आर. एस. ‘प्रीतम’

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