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Jul 25, 2016 · 1 min read

सफर

सफर में साथ चलने वाले
सभी तो नहीं होते हमसफ़र
सभी तो होते हैं
नितान्त,अजनबी
जिन से नहीं होता
कुछ भी परिचय
फिर भी
सफर में
ये बन जाते हैं
हम ख़्याल,हमसफ़र
और साथ बैठकर
बिता देते हैं
बहुत सा समय
साथ-साथ
उस वक़्त नहीं रहता खुछ भी ख़्याल
कि ये तो है मुसाफ़िर
आज इस सफ़र के
कल उस सफ़र के
फिर यूँ हीं पूरी उम्र निकल जायेगी
तब न होंगे ये…
न होंगी इनकी मीठी बातें…
सुनील पुष्करणा

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