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2 Sep 2022 · 1 min read

वंदनीय हैं मात-पिता, बतलाते श्री गणेश जी (भक्ति गीतिका)

वंदनीय हैं मात-पिता, बतलाते श्री गणेश जी (भक्ति गीतिका)
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(1)
वंदनीय हैं मात-पिता , बतलाते श्री गणेश जी
पिता और माता के गुण, नित गाते श्री गणेशजी
(2)
बड़ा कठिन था सारी पृथ्वी, का चक्कर लग पाना
मात-पिता का चक्कर लेकर, आते श्री गणेश जी
(3)
प्रथम पूज्य कहलाए सारे, देवों में इस कारण
जग को माता-पिता भक्ति, सिखलाते श्री गणेश जी
(4)
सिर को काटा महादेव, शंकर ने फिर जोड़ा था
हाथी का सिर-नाम गजानन, पाते श्री गणेश जी
(5)
सभी कार्य निर्विघ्न हमारे, शुभ निपटाने वाले
मोदक से होते प्रसन्न, हर्षाते श्री गणेश जी
“”””””””””””””””””””””””””””””””””””””””‘””””””””
रचयिता : रवि प्रकाश
बाजार सर्राफा, रामपुर (उत्तर प्रदेश)
मोबाइल 99976 15451

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