Sahityapedia
Login Create Account
Home
Search
Dashboard
Notifications
Settings
14 Mar 2023 · 1 min read

*श्रम से पीछे कब रही, नारी महिमावान (कुंडलिया)*

श्रम से पीछे कब रही, नारी महिमावान (कुंडलिया)
————————————
श्रम से पीछे कब रही, नारी महिमावान
कोमल है यदि तो वही, शक्ति-रूप चट्टान
शक्ति-रूप चट्टान, खींचती रिक्शा दिखती
कभी उड़ा कर यान, कथा साहस की लिखती
कहते रवि कविराय, दूर हो दुनिया भ्रम से
जीत रही हैं विश्व, नारियॉं अपने श्रम से
————————————–
रचयिता : रवि प्रकाश
बाजार सर्राफा, रामपुर, उत्तर प्रदेश
मोबाइल 99976 15451

1 Like · 365 Views
📢 Stay Updated with Sahityapedia!
Join our official announcements group on WhatsApp to receive all the major updates from Sahityapedia directly on your phone.
Books from Ravi Prakash
View all
You may also like:
जब कभी उनका ध्यान, मेरी दी हुई ring पर जाता होगा
जब कभी उनका ध्यान, मेरी दी हुई ring पर जाता होगा
The_dk_poetry
अधिकांश होते हैं गुमराह
अधिकांश होते हैं गुमराह
Umesh उमेश शुक्ल Shukla
मूर्ख बनाकर काक को, कोयल परभृत नार।
मूर्ख बनाकर काक को, कोयल परभृत नार।
डॉ.सीमा अग्रवाल
"चढ़ती उमर"
Dr. Kishan tandon kranti
अक्षर ज्ञान नहीं है बल्कि उस अक्षर का को सही जगह पर उपयोग कर
अक्षर ज्ञान नहीं है बल्कि उस अक्षर का को सही जगह पर उपयोग कर
Rj Anand Prajapati
International Camel Year
International Camel Year
Tushar Jagawat
दाम रिश्तों के
दाम रिश्तों के
Dr fauzia Naseem shad
मैं तो महज आवाज हूँ
मैं तो महज आवाज हूँ
VINOD CHAUHAN
इश्क में आजाद कर दिया
इश्क में आजाद कर दिया
Dr. Mulla Adam Ali
■ बड़ा सवाल...
■ बड़ा सवाल...
*Author प्रणय प्रभात*
राह पर चलते चलते घटित हो गई एक अनहोनी, थम गए कदम,
राह पर चलते चलते घटित हो गई एक अनहोनी, थम गए कदम,
Sukoon
अस्तित्व की ओट?🧤☂️
अस्तित्व की ओट?🧤☂️
डॉ० रोहित कौशिक
दीवारें ऊँचीं हुईं, आँगन पर वीरान ।
दीवारें ऊँचीं हुईं, आँगन पर वीरान ।
Arvind trivedi
तुम जिसे झूठ मेरा कहते हो
तुम जिसे झूठ मेरा कहते हो
Shweta Soni
दर्द
दर्द
Bodhisatva kastooriya
मौसम का क्या मिजाज है मत पूछिए जनाब।
मौसम का क्या मिजाज है मत पूछिए जनाब।
डॉ सगीर अहमद सिद्दीकी Dr SAGHEER AHMAD
अगर न बने नये रिश्ते ,
अगर न बने नये रिश्ते ,
शेखर सिंह
वंशवादी जहर फैला है हवा में
वंशवादी जहर फैला है हवा में
महेश चन्द्र त्रिपाठी
स्वयं पर नियंत्रण कर विजय प्राप्त करने वाला व्यक्ति उस व्यक्
स्वयं पर नियंत्रण कर विजय प्राप्त करने वाला व्यक्ति उस व्यक्
Paras Nath Jha
बसंत पंचमी
बसंत पंचमी
Mukesh Kumar Sonkar
🥀 *अज्ञानी की कलम*🥀
🥀 *अज्ञानी की कलम*🥀
जूनियर झनक कैलाश अज्ञानी झाँसी
With Grit in your mind
With Grit in your mind
Dhriti Mishra
ज़माने   को   समझ   बैठा,  बड़ा   ही  खूबसूरत है,
ज़माने को समझ बैठा, बड़ा ही खूबसूरत है,
संजीव शुक्ल 'सचिन'
तड़पता भी है दिल
तड़पता भी है दिल
हिमांशु Kulshrestha
2719.*पूर्णिका*
2719.*पूर्णिका*
Dr.Khedu Bharti
*अमृत-बेला आई है (देशभक्ति गीत)*
*अमृत-बेला आई है (देशभक्ति गीत)*
Ravi Prakash
उसे लगता है कि
उसे लगता है कि
Keshav kishor Kumar
हम वह मिले तो हाथ मिलाया
हम वह मिले तो हाथ मिलाया
gurudeenverma198
जिंदगी में पराया कोई नहीं होता,
जिंदगी में पराया कोई नहीं होता,
नेताम आर सी
"कामदा: जीवन की धारा" _____________.
Mukta Rashmi
Loading...