Sahityapedia
Login Create Account
Home
Search
Write
Notifications
Wall of Fame

श्रमिक

श्रमिक मिल जायेंगे
शहरों की तंग गलियों में
बजबजाती नालियों के किनारे
झुग्गियों में
चीथड़ों में लिपटे
और मिल जायेंगे
शहर की अलसायी सहर में
किसी चौराहे पर
चेहरे पर असंख्य चिंता की लकीरों
और कभी न मिटने वाली थकान के साथ
किसी की प्रतीक्षा में.
और प्रतीक्षा समाप्त नहीं होती तो
लौट जाते हैं
उन्हीं तंग, सड़ांध गलियों में
या फिर
शहरों की चौड़ी सड़कों की
विभाजक पटरियों पर
दुत्कारे जाने आशंका के बीच
रात काटने के लिए नित्य.

यह वही श्रमिक हैं
जो शहरों को ऊँचाइयां देते हैं
मशीनों को गति
और विकास को रफ़्तार
पर इन्हें कहाँ मयस्सर
रोटी, कपड़ा और मकान
में एक भी मुकम्मल
हाँ, मई दिवस पर मिलती है
शुभकामनाएं
चलो हम भी रस्म निभाते हैं
मई दिवस पर इन्हें
शुभकामना पठाते हैं
यह भी तो नहीं मिलती,
मर जाती है
इन्हीं की बनाई ड्राइंगरूमों में.

(1 मई, 2020)

4 Likes · 1 Comment · 186 Views
You may also like:
नववर्ष का संकल्प
DESH RAJ
कल भी होंगे हम तो अकेले
gurudeenverma198
संस्मरण:भगवान स्वरूप सक्सेना "मुसाफिर"
Ravi Prakash
" जीवित जानवर "
Dr Meenu Poonia
उड़ी पतंग
Buddha Prakash
दुर्योधन कब मिट पाया:भाग:38
AJAY AMITABH SUMAN
ऐसी बानी बोलिये
अरशद रसूल /Arshad Rasool
शादी से पहले और शादी के बाद
gurudeenverma198
✍️मैं परिंदा...!✍️
"अशांत" शेखर
निभाता चला गया
वीर कुमार जैन 'अकेला'
वक्त दर्पण दिखा दे तो अच्छा ही है।
Renuka Chauhan
मुरादाबाद स्मारिका* *:* *30 व 31 दिसंबर 1988 को उत्तर...
Ravi Prakash
" पवित्र रिश्ता "
Dr Meenu Poonia
जिंदगी की रेस
DESH RAJ
बेबस पिता
डाॅ. बिपिन पाण्डेय
मेरे हर सिम्त जो ग़म....
अश्क चिरैयाकोटी
शायरी ने बर्बाद कर दिया |
Dheerendra Panchal
कविराज
Buddha Prakash
✍️✍️लफ्ज़✍️✍️
"अशांत" शेखर
विश्व पुस्तक दिवस पर पुस्तको की वेदना
Ram Krishan Rastogi
खुदगर्ज़ थे वो ख्वाब
"अशांत" शेखर
जीवन मे कभी हार न मानों
Anamika Singh
हवाओं को क्या पता
Anuj yadav
हिन्दू साम्राज्य दिवस
jaswant Lakhara
जब वो कृष्णा मेरे मन की आवाज़ बन जाता है।
Manisha Manjari
【1】 साईं भजन { दिल दीवाने का डोला }
Arise DGRJ (Khaimsingh Saini)
जिदंगी के कितनें सवाल है।
Taj Mohammad
किस राह के हो अनुरागी
AJAY AMITABH SUMAN
ऐसा ही होता रिश्तों में पिता हमारा...!!
Taj Mohammad
मेरी भोली “माँ” (सहित्यपीडिया काव्य प्रतियोगिता)
पाण्डेय चिदानन्द
Loading...