Sahityapedia
Login Create Account
Home
Search
Dashboard
Notifications
Settings
19 Mar 2017 · 1 min read

शीशे के मर्तबानों के पीछे से…

कई यादें झाँकती हैं
इन शीशे के मर्तबानों के पीछे से,
कुछ खट्टी मीठी सी,
कुछ नमकीन और तीखी सी,
मसालेदार बातें हों जैसे,
कुछ मस्त ठहाके हों जैसे।

आम के फाँकों सी
हरी-हरी, ताज़ी-ताज़ी,
रस से सराबोर
प्यार की मानिंद,
मसालों में लिपटी,
गर्माहट मे सिमटी।

मिर्चों की लालिमा से भरी,
गुड़ की मख़मली डली,
तेल की धाराओं में खेलती,
मचलती, फिसलती,
शीशे में से झाँकती,
इतरात और इठलाती।

बरबस अपनी ओर खींचतीं,
कभी छेड़तीं, कभी ललचाती,
ऊष्ण सी एक राग जगाये,
बार-बार देखो मुझे बुलाये
रंगीनियों में खो जाने को,
दिन पुराने, फिर जी जाने को।

ऊष्मा से भर-भर जाती,
हर उस स्वाद का अहसान कराती
जो संग-संग चखे थें हमने,
वो खूबसूरत सपने जो देखे थें हमने,
सब प्यार से बुलाते हैं,
गज़ब की ख़ुमारी चढ़ाते हैं।

चटख़ारों से भरी,
थोड़ी खारी,
रस भरी,
चटपटी,
ये मचलती यादें,
झाँकती हुई, शीशे के मर्तबानों के पीछे से।।

©मधुमिता

Language: Hindi
241 Views
📢 Stay Updated with Sahityapedia!
Join our official announcements group on WhatsApp to receive all the major updates from Sahityapedia directly on your phone.
You may also like:
किस्से हो गए
किस्से हो गए
अनिल कुमार गुप्ता 'अंजुम'
Just lost in a dilemma when the abscisic acid of negativity
Just lost in a dilemma when the abscisic acid of negativity
Sukoon
जो संतुष्टि का दास बना, जीवन की संपूर्णता को पायेगा।
जो संतुष्टि का दास बना, जीवन की संपूर्णता को पायेगा।
Manisha Manjari
दोहा
दोहा
डाॅ. बिपिन पाण्डेय
■ प्रश्न का उत्तर
■ प्रश्न का उत्तर
*Author प्रणय प्रभात*
जीवन
जीवन
Bodhisatva kastooriya
2590.पूर्णिका
2590.पूर्णिका
Dr.Khedu Bharti
कितने घर ख़ाक हो गये, तुमने
कितने घर ख़ाक हो गये, तुमने
Anis Shah
अमृत मयी गंगा जलधारा
अमृत मयी गंगा जलधारा
Ritu Asooja
अभिव्यक्ति की सामरिकता - भाग 05 Desert Fellow Rakesh Yadav
अभिव्यक्ति की सामरिकता - भाग 05 Desert Fellow Rakesh Yadav
Desert fellow Rakesh
काश वो होते मेरे अंगना में
काश वो होते मेरे अंगना में
मनमोहन लाल गुप्ता 'अंजुम'
" दीया सलाई की शमा"
Pushpraj Anant
आया पर्व पुनीत....
आया पर्व पुनीत....
डॉ.सीमा अग्रवाल
बुध्द गीत
बुध्द गीत
Buddha Prakash
विडम्बना
विडम्बना
Shaily
मजदूर
मजदूर
umesh mehra
आज हमने सोचा
आज हमने सोचा
shabina. Naaz
!! वो बचपन !!
!! वो बचपन !!
Akash Yadav
*सुनहरे स्वास्थ्य से अच्छा, सुनहरा पल नहीं होता(मुक्तक)*
*सुनहरे स्वास्थ्य से अच्छा, सुनहरा पल नहीं होता(मुक्तक)*
Ravi Prakash
“यादों के झरोखे से”
“यादों के झरोखे से”
पंकज कुमार कर्ण
जयंत (कौआ) के कथा।
जयंत (कौआ) के कथा।
Acharya Rama Nand Mandal
दौलत
दौलत
Neeraj Agarwal
Desires are not made to be forgotten,
Desires are not made to be forgotten,
Sakshi Tripathi
पिया मिलन की आस
पिया मिलन की आस
Kanchan Khanna
सत्साहित्य सुरुचि उपजाता, दूर भगाता है अज्ञान।
सत्साहित्य सुरुचि उपजाता, दूर भगाता है अज्ञान।
महेश चन्द्र त्रिपाठी
मिले तो हम उनसे पहली बार
मिले तो हम उनसे पहली बार
DrLakshman Jha Parimal
किसका चौकीदार?
किसका चौकीदार?
Shekhar Chandra Mitra
गांव का दृश्य
गांव का दृश्य
Mukesh Kumar Sonkar
"चाहत का घर"
Dr. Kishan tandon kranti
सत्य की खोज
सत्य की खोज
Rekha Drolia
Loading...