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26 Sep 2022 · 1 min read

शायर का फ़र्ज़

किसी शायर के लिए
अब यही है मुनासिब!
जज़्बात की शिद्दत से
होकर वह आजिज़!!
अपने ख़ून-ए-दिल से
लिखता रहे नज़्में!
वक़्त और हालात के
तकाज़े के मुताबिक़!!
Shekhar Chandra Mitra
#सामंतवाद #पितृसत्ता #IranProtests #नारीवाद #hijab #equality #patriarchy #women #मनुवाद #feministpoetry #Feudalism

Language: Hindi
169 Views
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