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शाम से ही तेरी याद सताने लगती है

शाम से ही तेरी याद सताने लगती है।
पता नही क्या चीज तड़फाने लगती है।।

होगा मिलन हमारा जब रात हो जायेगी।
बाते करते करते सारी रात कट जायेगी।।

होगी सुबह जब सूर्य की किरण जगावेगी।
मस्ती भरी आंखों में तेरी यादें रह जायेगी।।

चाहती हूं बस इस तरह सारी उम्र कट जाए।
मेरी जिंदगी तेरी बाहों में ही सिमट जाए।।

उठे भी मेरा जनाजा बस तेरे ही घर से।
सुहागन बनकर जाऊं बस तेरे ही घर से।।

मांगती हूं दुआ लिखे हो तुम मेरे कर्म में।
बार बार मिलन हो तुमसे मेरा हर जन्म में।।

लिखता है रस्तोगी,उसको ये सब मिल जाए।
मेरा संदेशा उसके पास अवश्य पहुंच जाए।।

आर के रस्तोगी गुरुग्राम

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