Sahityapedia
Login Create Account
Home
Search
Dashboard
Notifications
Settings
30 Nov 2023 · 3 min read

“शादी के बाद- मिथिला दर्शन” ( संस्मरण )

डॉ लक्ष्मण झा परिमल

====================

शादी के दूसरे दिन बाराती 7 और 1 मेरे पिता जी और 1 मेरे बड़े भाई की विदाई हुई ! सभी लोगों को लाल -लाल धोती पहनाई गई ,कुर्ता और मिथिला पाग दिया गया ! भोजन कराया गया ! सारे लोग जमीन पर बैठे ! यह भोजन एक घंटा तक चला ! बारात पार्टी सिर्फ 9 थे ! खाना जमके खाने के बाद मिठाईओं का दौर चला ! और मिठाई को छोड़ लोगों ने 60,70 रसगुल्ले खाए ! खाना यदि कम खाएंगे तो पिलखवाड गाँव का नाक कट जाएगी ! बिहार के मैथिल ब्राह्मणों का मिथिला में खाना और खिलना प्रतिष्ठा की बात होती है ! मेरे ससुराल शिबीपट्टी में आम के बगीचे थे ! 29 जून 1974 का दिन था ! उस साल मालदह और कृष्णभोग खूब फले थे ! आम पहले से ही तोड़बा कर पकने छोड़ दिया गया था ! उसके सिर्फ मुँह को काटके पानी भरे बाल्टी में रखा गया था ! दही प्रचुर मात्रा में दिया गया वह भी बार -बार जिद्द करके ! अब बारी आयी आम की ! 20,30 आम तो आम बात थी ! रामचंद्र ठाकुर तो 50 आम खा गए !

भोजन के बाद पान सुपाड़ी दिया गया ! फिर सुहाग की प्रथा थी ! लड़की को आँगन में बिठाया जाता है और सारे लोग एक साथ लड़की को देखते हैं ! बारातिओं की ओर से मेरे पिता जी ने इकठठे 500 रुपये लड़की को मुँहदेखना दे दिया ! उसके बाद शिबीपट्टी गाँव के लोगों ने बाराती को स्वागत के साथ बिदा किया !

मुझे अकेले रीति -रिवाज के लिए रुकना पड़ा ! बैसे शादी के बाद महीने भर लड़के को ससुराल में रुकने की रीति चली आ रही है ! कोई यदि कम रुका तो गाँव में चर्चा होने लगती थी कि –

“लड़का नाराज है वरना इतना जल्दी क्यों चला गया ?”

सही में मिथिला में जमाई को भगवान मानते हैं ! पता नहीं यह धारणा प्रभु रामचंद्र के समय से चली आ रही है ! सुबह -सुबह साली सरहज आकर उठती थी ! बड़ी ग्लास में एक ग्लास दूध देते थे, साथ -साथ काजू किसमिश ! हठठे -कठठ्ए साले हाथ में काँसे के लोटे में पानी लेते थे और मुझे दूर खेतों की पगदंडियों पर ले जाकर छोड़ देते थे ! टॉइलेट खेतों में ही करना पड़ता था ! आने के वक्त लोटा मेरे हाथों से ले लेते थे ! घर पहुँचकर हाथ -पैर धुलवाते थे ! फिर जलखय ,दोपहर में भोजन ,शाम को नास्ता और रात को खाना !

सुबह घर और पड़ोस की महिलायें और युवतियाँ आकर आँगन में मधुर स्वर में “पराती” गाने लगती थी ! कम से कम तीन “पराती” महिलायें गातीं थी ! उनलोगों के मधुर गीतों का आनंद लेता था ! मैथिली गीत ,मैथिली मधुर भाषा ,आचार -विचारों ने ही मुझे आकर्षित किया ! मधुर गीत सुनकर जग गए ! पुनः 9 बजे महिलाओं का गीत नाद ! आशा को नित्य दिन गौरी पूजन करना पड़ता था ! 12 बजे भी महिलाओं का पारंपरिक गीत होता था पर इस गीत में मुझे और मेरे सारे परिवारों के सदस्यों को गाली दी जाती थी ! और खाना खाते यदि मैंने खाना बंद कर दिया तो गलिओं की झड़ी लग जाती थी ! फिर शाम को “महूहक” होता था ! कोबर घर में दो थालियाँ खीर की प्रत्येक शाम चार दिनों तक रखी जातीं थीं ! एक मेरा होता था और दूसरा मेरी आशा की ! थालियाँ बदली जातीं थीं जो एक खेल का हिस्सा होता था ! पीछे ध्यान बँटाने के लिए साली होती थी ! वह बिल्ली बनकर “मिआउँ ….. मिआउँ” करती थी ! उसे भी पीठ के पीछे खीर का एक दो नवाला देना पड़ता था !

चतुर्थी यानि चार दिनों तक नियम निष्ठा बनाए रखनी की प्रक्रिया थी ! चार दिनों तक भोजन में पति और पत्नी को नमक बर्जित था ! स्नान तक नहीं करना था ! मैं चौकी पर सोता था और मेरी आशा जमीन पर अपनी मौसी के साथ सोती थी ! उनकी मौसी हमलोगों की “विधकरी” थी ! धोती और कुर्ता मेरा तीन दिनों तक बदला नहीं गया !

आशा से मेरी बातें तक नहीं होती थी ! बैसे मैंने कई बार संकेत में विधकरी मौसी को कहा –

“ पाँचमे दिन मैं चला जाऊँगा!”

“ आपलोगों का चौथे दिन फिर से शादी होगी ! आप लोग स्नान और कपड़े बदलेंगे ! नमक खाएंगे ! फिर अपनी आशा से बातें कर लीजिएगा!” -मौसी ने जवाब दिया !

चतुर्थी के बाद दूसरे दिन मैं बिदा लिया ! गाँव के सारे लोग मुझे छोड़ने आए ! सब बड़े लोगों को झुककर प्रणाम किया ! जाते -जाते वादा किया चिठ्ठी लिखता रहूँगा ! शादी के बाद मधुर यादों को सँजोये लखनऊ के लिए चल पड़ा !

================

डॉ लक्ष्मण झा”परिमल ”

साउंड हेल्थ क्लिनिक

एस ० पी ० कॉलेज रोड

दुमका

झारखंड

30.11.2023

Language: Hindi
206 Views
📢 Stay Updated with Sahityapedia!
Join our official announcements group on WhatsApp to receive all the major updates from Sahityapedia directly on your phone.
You may also like:
वो इश्क़ अपना छुपा रहा था
वो इश्क़ अपना छुपा रहा था
Monika Arora
दोहा
दोहा
गुमनाम 'बाबा'
बड़ी दूर तक याद आते हैं,
बड़ी दूर तक याद आते हैं,
शेखर सिंह
श्रेय एवं प्रेय मार्ग
श्रेय एवं प्रेय मार्ग
सुरेश कुमार चतुर्वेदी
रिश्ता
रिश्ता
अखिलेश 'अखिल'
जीवन में कितना ही धन -धन कर ले मनवा किंतु शौक़ पत्रिका में न
जीवन में कितना ही धन -धन कर ले मनवा किंतु शौक़ पत्रिका में न
Neelam Sharma
मैं नन्हा नन्हा बालक हूँ
मैं नन्हा नन्हा बालक हूँ
अशोक कुमार ढोरिया
* दिल के दायरे मे तस्वीर बना दो तुम *
* दिल के दायरे मे तस्वीर बना दो तुम *
सुखविंद्र सिंह मनसीरत
Dr Arun Kumar shastri
Dr Arun Kumar shastri
DR ARUN KUMAR SHASTRI
बड़े हुए सब चल दिये,
बड़े हुए सब चल दिये,
sushil sarna
उत्थान राष्ट्र का
उत्थान राष्ट्र का
इंजी. संजय श्रीवास्तव
 मैं गोलोक का वासी कृष्ण
 मैं गोलोक का वासी कृष्ण
Pooja Singh
तुम कहो कोई प्रेम कविता
तुम कहो कोई प्रेम कविता
Surinder blackpen
शब्द अनमोल मोती
शब्द अनमोल मोती
krishna waghmare , कवि,लेखक,पेंटर
भभक
भभक
Dr.Archannaa Mishraa
ख्वाहिशों के बैंलेस को
ख्वाहिशों के बैंलेस को
Sunil Maheshwari
अगर मैं अपनी बात कहूँ
अगर मैं अपनी बात कहूँ
ruby kumari
2526.पूर्णिका
2526.पूर्णिका
Dr.Khedu Bharti
-- मैं --
-- मैं --
गायक - लेखक अजीत कुमार तलवार
" तिलिस्मी जादूगर "
Dr Meenu Poonia
कभी मायूस मत होना दोस्तों,
कभी मायूस मत होना दोस्तों,
Ranjeet kumar patre
मास्टर जी का चमत्कारी डंडा🙏
मास्टर जी का चमत्कारी डंडा🙏
तारकेश्‍वर प्रसाद तरुण
"कहाँ छुपोगे?"
Dr. Kishan tandon kranti
मैने प्रेम,मौहब्बत,नफरत और अदावत की ग़ज़ल लिखी, कुछ आशार लिखे
मैने प्रेम,मौहब्बत,नफरत और अदावत की ग़ज़ल लिखी, कुछ आशार लिखे
Bodhisatva kastooriya
तूफान सी लहरें मेरे अंदर है बहुत
तूफान सी लहरें मेरे अंदर है बहुत
कवि दीपक बवेजा
*बीमारी सबसे बुरी, तन को करे कबाड़* (कुंडलिया)
*बीमारी सबसे बुरी, तन को करे कबाड़* (कुंडलिया)
Ravi Prakash
मेरी फितरत में नहीं है हर किसी का हो जाना
मेरी फितरत में नहीं है हर किसी का हो जाना
Vishal babu (vishu)
श्री कृष्ण जन्माष्टमी...
श्री कृष्ण जन्माष्टमी...
डॉ.सीमा अग्रवाल
#प्रयोगात्मक_कविता-
#प्रयोगात्मक_कविता-
*प्रणय प्रभात*
बेचारा प्रताड़ित पुरुष
बेचारा प्रताड़ित पुरुष
Manju Singh
Loading...