Sahityapedia
Login Create Account
Home
Search
Write
Notifications
Wall of Fame
Jan 23, 2017 · 1 min read

शहर के लोग

मेरे शहर मे जो रहते है लोग
अलग से वो सब लगते हैं लोग
दूसरो को नसीहत देते हैं लोग
खुद सब गलत करते हैं लोग ।

सड़को पर मरना छोड़ देते है लोग
लुटता हुआ देख मुॅह फेर लेते हैं लोग
छोटी सी बात पर जान ले लेते है लोग
मनुष्य रूप मे कभी जानवर लगते हैं लोग ।

ढूंढने से नही मिलते वो लोग
जिन्हे फरिश्ता कहा करते थे लोग
कौन सी दुनिया मे वो रहते हैं लोग
सिर्फ किताबो मे मिलते हैं वो लोग ।

जाने कब वापिस आयेंगे वो करामाती लोग
हमे फिर से इन्सान बनायेंगे जो लोग ।।

राज विग

137 Views
You may also like:
अल्फाज़ ए ताज भाग-5
Taj Mohammad
लाल टोपी
मनोज कर्ण
बसन्त बहार
N.ksahu0007@writer
दरारों से।
Taj Mohammad
महाराष्ट्र की स्थिती
बिमल
✍️हार और जित✍️
"अशांत" शेखर
संतुलन-ए-धरा
AMRESH KUMAR VERMA
ज़िंदगी को चुना
अंजनीत निज्जर
अश्रुपात्र... A glass of tears भाग - 4
Dr. Meenakshi Sharma
मां से बिछड़ने की व्यथा
Dr. Alpa H. Amin
श्रमिक जो हूँ मैं तो...
मनोज कर्ण
हंँसना तुम सीखो ।
Buddha Prakash
Fast Food
Buddha Prakash
क़ैद में 15 वर्षों तक पृथ्वीराज और चंदबरदाई जीवित थे
महावीर उत्तरांचली • Mahavir Uttranchali
प्रलयंकारी कोरोना
Shriyansh Gupta
नवाब तो छा गया ...
ओनिका सेतिया 'अनु '
"ममता" (तीन कुण्डलिया छन्द)
महावीर उत्तरांचली • Mahavir Uttranchali
चौकड़िया छंद / ईसुरी छंद , विधान उदाहरण सहित ,...
Subhash Singhai
मुकरियां __नींद
Manu Vashistha
बेबस पिता
डाॅ. बिपिन पाण्डेय
आध्यात्मिक गंगा स्नान
सुरेश कुमार चतुर्वेदी
बताओ तो जाने
Ram Krishan Rastogi
कमर तोड़ता करधन
शेख़ जाफ़र खान
अक्षय तृतीया की हार्दिक शुभकामनाएं
sheelasingh19544 Sheela Singh
प्रेरक संस्मरण
अनिल कुमार गुप्ता 'अंजुम'
🌺प्रेम की राह पर-54🌺
शिवाभिषेक: 'आनन्द'(अभिषेक पाराशर)
बिक रहा सब कुछ
Dr. Rajeev Jain
चंद सांसे अभी बाकी है
Arjun Chauhan
धुआं उठा है कही,लगी है आग तो कही
Ram Krishan Rastogi
मैं धरती पर नीर हूं निर्मल, जीवन मैं ही चलाता...
सुरेश कुमार चतुर्वेदी
Loading...