Sahityapedia
Login Create Account
Home
Search
Dashboard
Notifications
Settings
17 May 2024 · 1 min read

वो जाने क्या कलाई पर कभी बांधा नहीं है।

गज़ल

1222/1222/1222/122
वो जाने क्या कलाई पर कभी बांधा नहीं है।
है राखी प्यार का बंधन महज धागा नहीं है।1

वो भाई क्या है जिसने प्यार बहना का न पाया,
वो बहना क्या है जिसने भाई को चाहा नहीं है।2

बहन‌ की रक्षा में कुर्बान कर दे जो सभी कुछ,
वो भाई सामने हो मौत भी डरता नहीं है।3

कलाई पर बॅंधी राखी वतन पर मिट गया जो,
वो भाई बहनों के खातिर कभी मरता नहीं है।4

वो बदक़िस्मत है भाई और बहनें दोस्तो गर,
वो जिंदा है मगर आपस में ही रिश्ता नहीं है।5

…✍️ सत्य कुमार प्रेमी

33 Views
📢 Stay Updated with Sahityapedia!
Join our official announcements group on WhatsApp to receive all the major updates from Sahityapedia directly on your phone.
You may also like:
पगली
पगली
Kanchan Khanna
प्रेम एक निर्मल,
प्रेम एक निर्मल,
हिमांशु Kulshrestha
गणतंत्र के मूल मंत्र की,हम अकसर अनदेखी करते हैं।
गणतंत्र के मूल मंत्र की,हम अकसर अनदेखी करते हैं।
सुरेश कुमार चतुर्वेदी
*यारा तुझमें रब दिखता है *
*यारा तुझमें रब दिखता है *
DR ARUN KUMAR SHASTRI
संवेदना -जीवन का क्रम
संवेदना -जीवन का क्रम
Rekha Drolia
कोई यादों में रहा, कोई ख्यालों में रहा;
कोई यादों में रहा, कोई ख्यालों में रहा;
manjula chauhan
सुना है हमने दुनिया एक मेला है
सुना है हमने दुनिया एक मेला है
VINOD CHAUHAN
गाली भरी जिंदगी
गाली भरी जिंदगी
Dr MusafiR BaithA
बरखा रानी
बरखा रानी
लक्ष्मी सिंह
खींच रखी हैं इश्क़ की सारी हदें उसने,
खींच रखी हैं इश्क़ की सारी हदें उसने,
शेखर सिंह
नारी तू नारायणी
नारी तू नारायणी
Dr.Pratibha Prakash
मुकाम
मुकाम
Swami Ganganiya
चंद्रयान
चंद्रयान
डिजेन्द्र कुर्रे
ग़ज़ल
ग़ज़ल
ईश्वर दयाल गोस्वामी
ले चल मुझे उस पार
ले चल मुझे उस पार
Satish Srijan
भगिनि निवेदिता
भगिनि निवेदिता
नंदलाल मणि त्रिपाठी पीताम्बर
नेताजी का पर्यावरण दिवस आयोजन
नेताजी का पर्यावरण दिवस आयोजन
Dr Mukesh 'Aseemit'
डोसा सब को भा रहा , चटनी-साँभर खूब (कुंडलिया)
डोसा सब को भा रहा , चटनी-साँभर खूब (कुंडलिया)
Ravi Prakash
करुंगा अब मैं वही, मुझको पसंद जो होगा
करुंगा अब मैं वही, मुझको पसंद जो होगा
gurudeenverma198
खुद को परोस कर..मैं खुद को खा गया
खुद को परोस कर..मैं खुद को खा गया
सिद्धार्थ गोरखपुरी
मैं खंडहर हो गया पर तुम ना मेरी याद से निकले
मैं खंडहर हो गया पर तुम ना मेरी याद से निकले
ब्रजनंदन कुमार 'विमल'
विचार
विचार
अनिल कुमार गुप्ता 'अंजुम'
कविता
कविता
Rambali Mishra
सज्ज अगर न आज होगा....
सज्ज अगर न आज होगा....
डॉ.सीमा अग्रवाल
मेरे लिखने से भला क्या होगा कोई पढ़ने वाला तो चाहिए
मेरे लिखने से भला क्या होगा कोई पढ़ने वाला तो चाहिए
DrLakshman Jha Parimal
नसीबों का मुकद्दर पर अब कोई राज़ तो होगा ।
नसीबों का मुकद्दर पर अब कोई राज़ तो होगा ।
Phool gufran
" मुझे सहने दो "
Aarti sirsat
2
2
सोलंकी प्रशांत (An Explorer Of Life)
"काश"
Dr. Kishan tandon kranti
ना जाने क्यों ?
ना जाने क्यों ?
Ramswaroop Dinkar
Loading...