Sahityapedia
Login Create Account
Home
Search
Dashboard
Notifications
Settings
14 Mar 2023 · 1 min read

💐प्रेम कौतुक-430💐

वो आज अक़्ल-ओ-होश में होंगे,
वो मेरी सर-ए-राह तक रहे होंगे,
दिल-ए-नादाँ से बहुत लबरेज़ हैं,
वो कहीं थक कर सो गए होंगे।।

©®अभिषेक: पाराशरः “आनन्द”

Language: Hindi
196 Views
📢 Stay Updated with Sahityapedia!
Join our official announcements group on WhatsApp to receive all the major updates from Sahityapedia directly on your phone.
You may also like:
जो उमेश हैं, जो महेश हैं, वे ही हैं भोले शंकर
जो उमेश हैं, जो महेश हैं, वे ही हैं भोले शंकर
महेश चन्द्र त्रिपाठी
प्रेम दिवानों  ❤️
प्रेम दिवानों ❤️
तारकेश्‍वर प्रसाद तरुण
आक्रोष
आक्रोष
Aman Sinha
भूख
भूख
RAKESH RAKESH
मन ,मौसम, मंजर,ये तीनों
मन ,मौसम, मंजर,ये तीनों
Shweta Soni
55 रुपए के बराबर
55 रुपए के बराबर
*Author प्रणय प्रभात*
-जीना यूं
-जीना यूं
Seema gupta,Alwar
*उड़न-खटोले की तरह, चला चंद्रमा-यान (कुंडलिया)*
*उड़न-खटोले की तरह, चला चंद्रमा-यान (कुंडलिया)*
Ravi Prakash
आपको देखते ही मेरे निगाहें आप पर आके थम जाते हैं
आपको देखते ही मेरे निगाहें आप पर आके थम जाते हैं
Sukoon
संत रविदास!
संत रविदास!
Bodhisatva kastooriya
हवाओं के भरोसे नहीं उड़ना तुम कभी,
हवाओं के भरोसे नहीं उड़ना तुम कभी,
Neelam Sharma
सतशिक्षा रूपी धनवंतरी फल ग्रहण करने से
सतशिक्षा रूपी धनवंतरी फल ग्रहण करने से
ओम प्रकाश श्रीवास्तव
मुक़ाम क्या और रास्ता क्या है,
मुक़ाम क्या और रास्ता क्या है,
SURYA PRAKASH SHARMA
प्यास
प्यास
sushil sarna
बड़ा सुंदर समागम है, अयोध्या की रियासत में।
बड़ा सुंदर समागम है, अयोध्या की रियासत में।
जगदीश शर्मा सहज
बदलाव
बदलाव
Shyam Sundar Subramanian
इस हसीन चेहरे को पर्दे में छुपाके रखा करो ।
इस हसीन चेहरे को पर्दे में छुपाके रखा करो ।
Phool gufran
💐 Prodigy Love-4💐
💐 Prodigy Love-4💐
शिवाभिषेक: 'आनन्द'(अभिषेक पाराशर)
दिनकर की दीप्ति
दिनकर की दीप्ति
AJAY AMITABH SUMAN
हमारे जख्मों पे जाया न कर।
हमारे जख्मों पे जाया न कर।
Manoj Mahato
ग़ज़ल
ग़ज़ल
ईश्वर दयाल गोस्वामी
सिर्फ पार्थिव शरीर को ही नहीं बल्कि जो लोग जीते जी मर जाते ह
सिर्फ पार्थिव शरीर को ही नहीं बल्कि जो लोग जीते जी मर जाते ह
पूर्वार्थ
जिस घर में---
जिस घर में---
लक्ष्मी सिंह
** मुक्तक **
** मुक्तक **
surenderpal vaidya
ताप जगत के झेलकर, मुरझा हृदय-प्रसून।
ताप जगत के झेलकर, मुरझा हृदय-प्रसून।
डॉ.सीमा अग्रवाल
फिर से ऐसी कोई भूल मैं
फिर से ऐसी कोई भूल मैं
gurudeenverma198
*अच्छी आदत रोज की*
*अच्छी आदत रोज की*
Dushyant Kumar
ग़ज़ल
ग़ज़ल
डॉ सगीर अहमद सिद्दीकी Dr SAGHEER AHMAD
बाल कविता: मुन्नी की मटकी
बाल कविता: मुन्नी की मटकी
Rajesh Kumar Arjun
तुम्हें नहीं पता, तुम कितनों के जान हो…
तुम्हें नहीं पता, तुम कितनों के जान हो…
Anand Kumar
Loading...