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25 Mar 2023 · 1 min read

“वाह रे जमाना”

“वाह रे जमाना”
पैसे की धुन जो लगी
भूख और बढ़ने लगी,
चैन सुख सब खो गया
बेचैनियाँ सिर चढ़ने लगी,
ओस की बून्दें भी मानो
दर्द को चखने लगी,
खून के रिश्तों में अब
भावनाएँ मरने लगी।

9 Likes · 4 Comments · 562 Views
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