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13 Jun 2023 · 1 min read

*जितनी जिसकी सोच संकुचित, वह उतना मेधावी है (मुक्तक)*

जितनी जिसकी सोच संकुचित, वह उतना मेधावी है (मुक्तक)
—————————————-
राजनीति में सिद्धांतों पर, जाति-व्यवस्था हावी है
जातिवाद का समीकरण ही, केवल आज प्रभावी है
बौनों के हाथों में आती, दिखती सत्ता की चाबी
जितनी जिसकी सोच संकुचित, वह उतना मेधावी है
—————————————-
रचयिता : रवि प्रकाश
बाजार सर्राफा ,रामपुर (उत्तर प्रदेश)
मोबाइल 999761 5451

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