Sahityapedia
Login Create Account
Home
Search
Dashboard
Notifications
Settings
12 Jun 2023 · 1 min read

वर्तमान समय में संस्कार और सभ्यता मर चुकी है

वर्तमान समय में संस्कार और सभ्यता मर चुकी है
एक नई सभ्यता उत्पन्न हो चुकी है
और वह सभ्यता है खुम्मारी और पैसा
इसी से लोग नयी सभ्यता को जन्म देते हैं
और नए आयाम प्राप्त करते हैं
तो हम जी रहे हैं
नई सभ्यता खुम्मारी और पैसा में

सद्कवि प्रेमदास वसु सुरेखा

276 Views
📢 Stay Updated with Sahityapedia!
Join our official announcements group on WhatsApp to receive all the major updates from Sahityapedia directly on your phone.
You may also like:
मन के भाव
मन के भाव
Surya Barman
दोहा त्रयी. . . सन्तान
दोहा त्रयी. . . सन्तान
sushil sarna
24 के लिए
24 के लिए
*Author प्रणय प्रभात*
🌺आलस्य🌺
🌺आलस्य🌺
सुरेश अजगल्ले 'इन्द्र '
5 किलो मुफ्त के राशन का थैला हाथ में लेकर खुद को विश्वगुरु क
5 किलो मुफ्त के राशन का थैला हाथ में लेकर खुद को विश्वगुरु क
शेखर सिंह
सफलता
सफलता
Vandna Thakur
उन्हें हद पसन्द थीं
उन्हें हद पसन्द थीं
हिमांशु Kulshrestha
नर्क स्वर्ग
नर्क स्वर्ग
Bodhisatva kastooriya
*****खुद का परिचय *****
*****खुद का परिचय *****
सुखविंद्र सिंह मनसीरत
रेतीले तपते गर्म रास्ते
रेतीले तपते गर्म रास्ते
Atul "Krishn"
कौन सुने फरियाद
कौन सुने फरियाद
विनोद वर्मा ‘दुर्गेश’
मुझे तो मेरी फितरत पे नाज है
मुझे तो मेरी फितरत पे नाज है
नेताम आर सी
Work hard and be determined
Work hard and be determined
Sakshi Tripathi
2665.*पूर्णिका*
2665.*पूर्णिका*
Dr.Khedu Bharti
नये गीत गायें
नये गीत गायें
Arti Bhadauria
आयी प्यारी तीज है,झूलें मिलकर साथ
आयी प्यारी तीज है,झूलें मिलकर साथ
Dr Archana Gupta
कभी उगता हुआ तारा रोशनी बांट लेता है
कभी उगता हुआ तारा रोशनी बांट लेता है
कवि दीपक बवेजा
क्यों पढ़ा नहीं भूगोल?
क्यों पढ़ा नहीं भूगोल?
AJAY AMITABH SUMAN
विश्व गौरैया दिवस
विश्व गौरैया दिवस
ब्रजनंदन कुमार 'विमल'
आज़ाद पैदा हुआ आज़ाद था और आज भी आजाद है।मौत के घाट उतार कर
आज़ाद पैदा हुआ आज़ाद था और आज भी आजाद है।मौत के घाट उतार कर
Rj Anand Prajapati
खामोश कर्म
खामोश कर्म
Sandeep Pande
रोबोटिक्स -एक समीक्षा
रोबोटिक्स -एक समीक्षा
Shyam Sundar Subramanian
उसने आंखों में
उसने आंखों में
Dr fauzia Naseem shad
एक कप कड़क चाय.....
एक कप कड़क चाय.....
Santosh Soni
हंसी मुस्कान
हंसी मुस्कान
नंदलाल मणि त्रिपाठी पीताम्बर
बहुत दिनों के बाद दिल को फिर सुकून मिला।
बहुत दिनों के बाद दिल को फिर सुकून मिला।
Prabhu Nath Chaturvedi "कश्यप"
*चौदह अगस्त को मंथन से,निकला सिर्फ हलाहल था
*चौदह अगस्त को मंथन से,निकला सिर्फ हलाहल था
Ravi Prakash
तूने ही मुझको जीने का आयाम दिया है
तूने ही मुझको जीने का आयाम दिया है
हरवंश हृदय
कौन कहता है कि नदी सागर में
कौन कहता है कि नदी सागर में
Anil Mishra Prahari
वह (कुछ भाव-स्वभाव चित्र)
वह (कुछ भाव-स्वभाव चित्र)
Dr MusafiR BaithA
Loading...