Sahityapedia
Login Create Account
Home
Search
Dashboard
Notifications
Settings
1 Jul 2016 · 1 min read

वक्त बक्त की बात (मेरे नौ शेर )

(एक )

अपने थे , वक़्त भी था , वक़्त वह और था यारों
वक़्त पर भी नहीं अपने बस मजबूरी का रेला है

(दो )

वक़्त की रफ़्तार का कुछ भी भरोसा है नहीं
कल तलक था जो सुहाना कल बही विकराल हो

(तीन )

बक्त के साथ बहना ही असल तो यार जीबन है
बक्त को गर नहीं समझे बक्तफिर रूठ जाता है

(चार )

बक्त कब किसका हुआ जो अब मेरा होगा
बुरे बक्त को जानकर सब्र किया मैनें

(पांच)

बक्त के साथ बहने का मजा कुछ और है प्यारे
बरना, रिश्तें काँच से नाजुक इनको टूट जाना है

(छह )

वक्त की मार सबको सिखाती सबक़ है
ज़िन्दगी चंद सांसों की लगती जुआँ है

(सात)

मेहनत से बदली “मदन ” देखो किस्मत
बुरे वक्त में ज़माना किसका हुआ है

(आठ)

बक्त ये आ गया कैसा कि मिलता अब समय ना है
रिश्तों को निभाने के अब हालात बदले हैं

(नौ)
ना खाने को ना पीने को ,ना दो पल चैन जीने को
ये कैसा वक़्त है यारों , ये जल्दी से गुजर जाये

वक्त बक्त की बात (मेरे नौ शेर )

मदन मोहन सक्सेना

Language: Hindi
Tag: शेर
1 Comment · 570 Views
📢 Stay Updated with Sahityapedia!
Join our official announcements group on WhatsApp to receive all the major updates from Sahityapedia directly on your phone.
You may also like:
पानी से पानी पर लिखना
पानी से पानी पर लिखना
Ramswaroop Dinkar
तुझसे कुछ नहीं चाहिये ए जिन्दगीं
तुझसे कुछ नहीं चाहिये ए जिन्दगीं
Jay Dewangan
मधुर व्यवहार
मधुर व्यवहार
Paras Nath Jha
राम आ गए
राम आ गए
ओमप्रकाश भारती *ओम्*
नित नए संघर्ष करो (मजदूर दिवस)
नित नए संघर्ष करो (मजदूर दिवस)
डॉ. श्री रमण 'श्रीपद्'
💐दुधई💐
💐दुधई💐
DR ARUN KUMAR SHASTRI
राजनीति हलचल
राजनीति हलचल
Dr. Sunita Singh
दिये को रोशन बनाने में रात लग गई
दिये को रोशन बनाने में रात लग गई
कवि दीपक बवेजा
मर्यादा पुरुषोत्तम श्री राम
मर्यादा पुरुषोत्तम श्री राम
Er.Navaneet R Shandily
पेड़ लगाए पास में, धरा बनाए खास
पेड़ लगाए पास में, धरा बनाए खास
जगदीश लववंशी
* करते कपट फरेब *
* करते कपट फरेब *
surenderpal vaidya
नेता पक रहा है
नेता पक रहा है
Sanjay ' शून्य'
पीताम्बरी आभा
पीताम्बरी आभा
manisha
Gazal
Gazal
डॉ सगीर अहमद सिद्दीकी Dr SAGHEER AHMAD
■ खरी-खरी / प्रसंगवश
■ खरी-खरी / प्रसंगवश
*Author प्रणय प्रभात*
*माँ शारदे वन्दना
*माँ शारदे वन्दना
संजय कुमार संजू
सुन सको तो सुन लो
सुन सको तो सुन लो
Shekhar Chandra Mitra
बंधन
बंधन
Suryakant Dwivedi
सुध जरा इनकी भी ले लो ?
सुध जरा इनकी भी ले लो ?
तारकेश्‍वर प्रसाद तरुण
जी लगाकर ही सदा,
जी लगाकर ही सदा,
महावीर उत्तरांचली • Mahavir Uttranchali
अपनी जिंदगी मे कुछ इस कदर मदहोश है हम,
अपनी जिंदगी मे कुछ इस कदर मदहोश है हम,
Vaishnavi Gupta (Vaishu)
*वसंत 【कुंडलिया】*
*वसंत 【कुंडलिया】*
Ravi Prakash
दिल को दिल से खुशी होती है
दिल को दिल से खुशी होती है
shabina. Naaz
जीने की
जीने की
Dr fauzia Naseem shad
कर्त्तव्य
कर्त्तव्य
डॉ विजय कुमार कन्नौजे
आखिरी उम्मीद
आखिरी उम्मीद
Surya Barman
अच्छी थी पगडंडी अपनी।सड़कों पर तो जाम बहुत है।।
अच्छी थी पगडंडी अपनी।सड़कों पर तो जाम बहुत है।।
पूर्वार्थ
आज यूँ ही कुछ सादगी लिख रही हूँ,
आज यूँ ही कुछ सादगी लिख रही हूँ,
Swara Kumari arya
💐💐मथुरा का छोरा,मेरी ले ले राधे राधे💐💐
💐💐मथुरा का छोरा,मेरी ले ले राधे राधे💐💐
शिवाभिषेक: 'आनन्द'(अभिषेक पाराशर)
प्रेम
प्रेम
Dr. Shailendra Kumar Gupta
Loading...