Sahityapedia
Login Create Account
Home
Search
Dashboard
Notifications
Settings
11 May 2022 · 1 min read

लौट आई जिंदगी बेटी बनकर!

शीर्षक – लौट आई जिंदगी बेटी बनकर !

विधा – कविता

परिचय – ज्ञानीचोर
शोधार्थी व कवि साहित्यकार
मु.पो. रघुनाथगढ़, सीकर राज.
पिन 332027
मो. 9001321438

लौट आई जिंदगी बेटी बनकर
जब सब कुछ बह गया
जल-प्लावन में सालों पहले
उजड़ गयी थी कोमल लहरें
ठहर-ठहर सिहर जाता
काँप जाता था मन
किसी अंधेरी गुहा में
जब छाया पड़ती
काली छाया उभकर
कर देती विकृत चेहरा ।
कँपकँपी छूट जाती साँसों में
अटक जाती वाणी जब कंठ में
भय खाती आत्मा भटक जाती
काला गहन साया
लगा रहता पीछे मेरे
तब…….!
लौट आई जिंदगी बेटी बनकर

विचारों में दबाकर जब
अपना आत्म स्वरूप
निकल जाता चौराहें पर
जीवन का सत्य भूलकर
तब दबे पाँव पीछा करते
अतीत के साये
जब ओढ़ लेता मुस्कान
और कर लेता समझौता
तब आत्मा विद्रोह करती
और भय मुक्त होने की
हर संभावना को अपनाता
उस समय जीवन डूबता था
मौत की क्षितिज में
किंतु…….
मैं खुश हो सका
लौट आई जिंदगी बेटी बनकर।

मौत के चौराहे से नापता
साँसों की दूरी जीवन से
तब दूरी मापक यंत्र की बजाय
हाथ में थर्मामीटर थाम कर
मैं नापता था जीवन को
तब ताप चढ़ता हुड़दंग का
और कमजोर हो जाता
टूट कर बिखर जाता था
तब ओढ़ना पड़ता था शांति
मुस्कान में दबा
जिससे सवाल ही न उठे
पर मोटी मुस्कान के आगे
व्यर्थ रहा था प्रयास
क्योंकि…….!
लौट आई जिंदगी बेटी बनकर!

Language: Hindi
4 Likes · 462 Views
📢 Stay Updated with Sahityapedia!
Join our official announcements group on WhatsApp to receive all the major updates from Sahityapedia directly on your phone.
You may also like:
Mental health
Mental health
Bidyadhar Mantry
स्वप्न बेचकर  सभी का
स्वप्न बेचकर सभी का
महेश चन्द्र त्रिपाठी
राम नाम की जय हो
राम नाम की जय हो
Paras Nath Jha
सरिए से बनाई मोहक कलाकृतियां……..
सरिए से बनाई मोहक कलाकृतियां……..
Nasib Sabharwal
हिन्दी दिवस
हिन्दी दिवस
मनोज कर्ण
चंडीगढ़ का रॉक गार्डेन
चंडीगढ़ का रॉक गार्डेन
Satish Srijan
पुत्र एवं जननी
पुत्र एवं जननी
रिपुदमन झा "पिनाकी"
चाय का निमंत्रण
चाय का निमंत्रण
सुरेन्द्र शर्मा 'शिव'
विचार
विचार
अनिल कुमार गुप्ता 'अंजुम'
🕊️एक परिंदा उड़ चला....!
🕊️एक परिंदा उड़ चला....!
Srishty Bansal
नसीबों का मुकद्दर पर अब कोई राज़ तो होगा ।
नसीबों का मुकद्दर पर अब कोई राज़ तो होगा ।
Phool gufran
"मातृत्व"
Dr. Kishan tandon kranti
शाम
शाम
N manglam
लिट्टी छोला
लिट्टी छोला
आकाश महेशपुरी
*दादाजी (बाल कविता)*
*दादाजी (बाल कविता)*
Ravi Prakash
#Dr Arun Kumar shastri
#Dr Arun Kumar shastri
DR ARUN KUMAR SHASTRI
सपने सारे टूट चुके हैं ।
सपने सारे टूट चुके हैं ।
Arvind trivedi
गज़रा
गज़रा
Alok Saxena
दोहा
दोहा
गुमनाम 'बाबा'
अर्थ में,अनर्थ में अंतर बहुत है
अर्थ में,अनर्थ में अंतर बहुत है
Shweta Soni
राजनीति
राजनीति
Bodhisatva kastooriya
एक शकुन
एक शकुन
Swami Ganganiya
अवसाद
अवसाद
Dr. Rajeev Jain
जीवन पथ पर सब का अधिकार
जीवन पथ पर सब का अधिकार
गायक - लेखक अजीत कुमार तलवार
तेरी चाहत में सच तो तुम हो
तेरी चाहत में सच तो तुम हो
Neeraj Agarwal
वो छोटी सी खिड़की- अमूल्य रतन
वो छोटी सी खिड़की- अमूल्य रतन
Amulyaa Ratan
कुछ यथार्थ कुछ कल्पना कुछ अरूप कुछ रूप।
कुछ यथार्थ कुछ कल्पना कुछ अरूप कुछ रूप।
Mahendra Narayan
3482.🌷 *पूर्णिका* 🌷
3482.🌷 *पूर्णिका* 🌷
Dr.Khedu Bharti
मोहब्बत कि बाते
मोहब्बत कि बाते
Rituraj shivem verma
कभी धूप तो कभी बदली नज़र आयी,
कभी धूप तो कभी बदली नज़र आयी,
Rajesh Kumar Arjun
Loading...