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15 Feb 2024 · 1 min read

लोग जाने किधर गये

अवशेष शेष बचे यादों के
लोग जाने किधर गये
जो थे खास बहुत वो
लोग जाने किधर गये
अधरों पर है अब मौन
लोग जाने किधर गये
खुल कर मिलते थे जो वो
लोग जाने किधर गये
बिन बातों के भी जो कर लेते थे बातें वो
लोग जाने किधर गये
समय का पहिया घुमा ऐसा भाई
जान से प्यारे थे जो लोग
वो जाने किधर गये

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