Sahityapedia
Login Create Account
Home
Search
Dashboard
Notifications
Settings
6 Oct 2023 · 1 min read

लिखना चाहूँ अपनी बातें , कोई नहीं इसको पढ़ता है ! बातें कह

लिखना चाहूँ अपनी बातें , कोई नहीं इसको पढ़ता है ! बातें कह भी डालें सबको , कोई भी नहीं समझता है !! सब अपनों में गुम हैं यारों , किसी की कोई परवाह नहीं !अपनी धुन पर सब नाचेंगे ,औरों की कोई चाह नहीं !!@परिमल

345 Views
📢 Stay Updated with Sahityapedia!
Join our official announcements group on WhatsApp to receive all the major updates from Sahityapedia directly on your phone.
You may also like:
पेड़ लगाओ पर्यावरण बचाओ
पेड़ लगाओ पर्यावरण बचाओ
Buddha Prakash
आ जा उज्ज्वल जीवन-प्रभात।
आ जा उज्ज्वल जीवन-प्रभात।
Anil Mishra Prahari
सारी जिंदगी कुछ लोगों
सारी जिंदगी कुछ लोगों
shabina. Naaz
आज और कल
आज और कल
डॉ विजय कुमार कन्नौजे
*अग्रोहा फिर से मिले, फिर से राजा अग्र (कुंडलिया)*
*अग्रोहा फिर से मिले, फिर से राजा अग्र (कुंडलिया)*
Ravi Prakash
आलता-महावर
आलता-महावर
Pakhi Jain
■ केवल लूट की मंशा।
■ केवल लूट की मंशा।
*Author प्रणय प्रभात*
मेरे जाने के बाद ,....
मेरे जाने के बाद ,....
ओनिका सेतिया 'अनु '
भारत और इंडिया तुलनात्मक सृजन
भारत और इंडिया तुलनात्मक सृजन
लक्ष्मी सिंह
तू कहीं दूर भी मुस्करा दे अगर,
तू कहीं दूर भी मुस्करा दे अगर,
Satish Srijan
फितरत
फितरत
Dr fauzia Naseem shad
कृष्ण दामोदरं
कृष्ण दामोदरं
नंदलाल मणि त्रिपाठी पीताम्बर
विचार
विचार
अनिल कुमार गुप्ता 'अंजुम'
मुझे लगता था
मुझे लगता था
ruby kumari
खुश्क आँखों पे क्यूँ यकीं होता नहीं
खुश्क आँखों पे क्यूँ यकीं होता नहीं
sushil sarna
ख्वाहिश
ख्वाहिश
Neelam Sharma
सही कहो तो तुम्हे झूटा लगता है
सही कहो तो तुम्हे झूटा लगता है
Rituraj shivem verma
हमारे ख्याब
हमारे ख्याब
Aisha Mohan
महापुरुषों की सीख
महापुरुषों की सीख
Dr. Pradeep Kumar Sharma
भैया  के माथे तिलक लगाने बहना आई दूर से
भैया के माथे तिलक लगाने बहना आई दूर से
सुखविंद्र सिंह मनसीरत
नीरज…
नीरज…
Mahendra singh kiroula
*लू के भभूत*
*लू के भभूत*
Santosh kumar Miri
कैसी लगी है होड़
कैसी लगी है होड़
Sûrëkhâ
तेरी वापसी के सवाल पर, ख़ामोशी भी खामोश हो जाती है।
तेरी वापसी के सवाल पर, ख़ामोशी भी खामोश हो जाती है।
Manisha Manjari
दूसरों की आलोचना
दूसरों की आलोचना
Dr.Rashmi Mishra
Gamo ko chhipaye baithe hai,
Gamo ko chhipaye baithe hai,
Sakshi Tripathi
चाहे मेरे भविष्य मे वह मेरा हमसफ़र न हो
चाहे मेरे भविष्य मे वह मेरा हमसफ़र न हो
शेखर सिंह
खुली आंखें जब भी,
खुली आंखें जब भी,
Lokesh Singh
"गुलजार"
Dr. Kishan tandon kranti
वो गली भी सूनी हों गयीं
वो गली भी सूनी हों गयीं
The_dk_poetry
Loading...