Sahityapedia
Login Create Account
Home
Search
Dashboard
Notifications
Settings
30 Jan 2024 · 1 min read

*लाल सरहद* ( 13 of 25 )

लाल सरहद

लोग कितने भी शहीद हो जायें ,
लाल सरहद का क्या बिगड़ता है …

रात पूनम के चांदनी महंगी ,
वैसे हर रोज भाव गिरता है ….

झील सूखे या बाड़ आ जाये ,
रोके सावन कहाँ ठहरता है…

साथ रोशनी का देने को ,
दिन कभी कहाँ बढ़ता है …..

खिलती कलियां सूख जाती हैं ,
मौसमों को कहाँ अखरता है …

ओस के सूख जाने पर ,
कहाँ गुलों को फर्क पड़ता है ….

रात बेफिक्र सदा रहती है ,
दिया ही अंधेरो से लड़ता है …

यही चलन है मोहब्बत का ,
जब कहर एक तरफ पड़ता है ..

क्षमा उर्मिला

2 Likes · 81 Views
📢 Stay Updated with Sahityapedia!
Join our official announcements group on WhatsApp to receive all the major updates from Sahityapedia directly on your phone.
Books from Kshma Urmila
View all
You may also like:
जय हनुमान
जय हनुमान
Santosh Shrivastava
"मीरा के प्रेम में विरह वेदना ऐसी थी"
Ekta chitrangini
अनमोल वचन
अनमोल वचन
Jitendra Chhonkar
*हिंदी मेरे देश की जुबान है*
*हिंदी मेरे देश की जुबान है*
सुखविंद्र सिंह मनसीरत
अन्नदाता किसान
अन्नदाता किसान
ओम प्रकाश श्रीवास्तव
कहमुकरी
कहमुकरी
डॉ.सीमा अग्रवाल
हो असत का नगर तो नगर छोड़ दो।
हो असत का नगर तो नगर छोड़ दो।
Sanjay ' शून्य'
*** मेरा पहरेदार......!!! ***
*** मेरा पहरेदार......!!! ***
VEDANTA PATEL
#मुक्तक
#मुक्तक
*Author प्रणय प्रभात*
वाचाल सरपत
वाचाल सरपत
आनन्द मिश्र
बलिदानी सिपाही
बलिदानी सिपाही
नील पदम् Deepak Kumar Srivastava (दीपक )(Neel Padam)
Tum meri kalam ka lekh nahi ,
Tum meri kalam ka lekh nahi ,
Sakshi Tripathi
*मनुज ले राम का शुभ नाम, भवसागर से तरते हैं (मुक्तक)*
*मनुज ले राम का शुभ नाम, भवसागर से तरते हैं (मुक्तक)*
Ravi Prakash
ना प्रेम मिल सका ना दोस्ती मुकम्मल हुई...
ना प्रेम मिल सका ना दोस्ती मुकम्मल हुई...
Keshav kishor Kumar
~~तीन~~
~~तीन~~
Dr. Vaishali Verma
घाव करे गंभीर
घाव करे गंभीर
विनोद वर्मा ‘दुर्गेश’
सागर की ओर
सागर की ओर
सुशील मिश्रा ' क्षितिज राज '
मुक्तक-
मुक्तक-
डाॅ. बिपिन पाण्डेय
मां की ममता जब रोती है
मां की ममता जब रोती है
Harminder Kaur
विचार
विचार
अनिल कुमार गुप्ता 'अंजुम'
आप लिखते कमाल हैं साहिब।
आप लिखते कमाल हैं साहिब।
सत्य कुमार प्रेमी
ऋतु परिवर्तन
ऋतु परिवर्तन
ओमप्रकाश भारती *ओम्*
मेरे पापा
मेरे पापा
Dr. Pradeep Kumar Sharma
इंसान स्वार्थी इसलिए है क्योंकि वह बिना स्वार्थ के किसी भी क
इंसान स्वार्थी इसलिए है क्योंकि वह बिना स्वार्थ के किसी भी क
Rj Anand Prajapati
कभी लौट गालिब देख हिंदुस्तान को क्या हुआ है,
कभी लौट गालिब देख हिंदुस्तान को क्या हुआ है,
शेखर सिंह
रख हौसला, कर फैसला, दृढ़ निश्चय के साथ
रख हौसला, कर फैसला, दृढ़ निश्चय के साथ
Krishna Manshi
किसान
किसान
Bodhisatva kastooriya
इस बुझी हुई राख में तमाम राज बाकी है
इस बुझी हुई राख में तमाम राज बाकी है
कवि दीपक बवेजा
Image at Hajipur
Image at Hajipur
Hajipur
3169.*पूर्णिका*
3169.*पूर्णिका*
Dr.Khedu Bharti
Loading...