Sahityapedia
Login Create Account
Home
Search
Write
Notifications
Wall of Fame
May 8, 2022 · 2 min read

लाडली की पुकार!

सिर पर जब तक पापा का साया,
बिन माँगे ही सब कुछ मैंने पाया।
वटवृक्ष सहारे कोमल लघु बेल,
आश्रिता बस मगन अपने खेल।

वे थे तो न चिंता, न कोई अवसाद,
पितु छत्र तले छिपे खिले आह्लाद।
पापा के कंधे चढ़ देखे कितने मेले
बाँहों में दुबक भूले सकल झमेले।

संघर्ष में पितृगण ढल जाते ढाल,
बचाव सतत करते स्वयं निढाल।
पुत्री हित काज चाहे गात न शक्ति
प्राण बसे तनया में ऐसी आसक्ति

वात्सल्य सबसे मिला जो अधिक,
पुत्री से अति स्नेह है अनुवांशिक।
सर्वविदित है पिता-सुता का नाता,
अनन्य अनुपम अप्रतिम कहलाता।

थर-थर थर्राता जहाँ सारा परिवार,
लुटाते मुझपर भरपूर प्यार-दुलार।
उनसे अपनी मनवा न पाए कोई,
मानी मेरी कही चाहे जागे-सोई।

कलम पकड़ाई जब से हाथ में,
धार लगाई बन खड्ग साथ में।
तोल-मोल बोलना सिखलाया,
मितव्यय वर्णों का भेद सुझाया।

एक आवाज़ मेरी का ये परिणाम
दौड़े आते छोड़ सभी काम-धाम
उपलब्धि मेरी तो बाँटते वे पतीसे
बतियाते सुख-दुख सखियों जैसे

समझाया समझना पीड़ित का दर्द,
झुलसें हों दिन चाहे रातें हों सर्द।
सहानुभूति से जुड़े मनुज के तत्त्व,
समानुभूत उनके तत्त्वों का सत्त्व।

अम्बर तक खुशियाँ तुमसे पापा
बचपन छिपा सहसा चढ़ा बुढ़ापा
हँसी छिनी मुख छाई गहन उदासी
क्या प्राण क्या तन हर रोम उपासी

तुमसे मेरा अस्तित्व अभिमानी,
फिर कैसे न पीड़ा मेरी पहचानी।
चले पड़े दूर सितारों की दुनिया,
कहाँ ढूँढे तलाशे तुम्हरी मुनिया।

कुछ बतला जाते जाने से पहले,
तैयार हो बेटी अब दु:ख सह ले।
छोड़ा मँझधार खींच ली पतवार,
क्यों नहीं सुनी मेरी मान मनुहार।

किस हाल निज बेटी को धकेला,
घिरे रिश्ते-नाते पर लगे अकेला।
अटूट बंधन का धागा पहचाना,
तोड़ा तुमने जो जग ताना-बाना।

छ: माह लगे युग सदियाँ बीतीं,
माँ भी तुम बिन हारी-सी जीतीं।
उजड़े जन जिनके तुम रहे सहारे,
क्योंकर तुमने एक क्षण में बिसारे।

याद करूँ तुम्हें पड़ते दिखलाई,
अब नहीं भाग्य में वह परछाई।
भागूँ पकड़ूँ हरदम यादों के साये,
आँख भरीं हाथ खाली रह जाए।

बहुत छका लिया तुमने बाबुल,
दरस दिखाओ यह धी आकुल।
थम जाए अविरल अश्रु की धारा,
पापा! सुनो, लाड़ली ने है पुकारा।

-डॉ॰ आरती ‘लोकेश’
-दुबई, यू.ए.ई.
-arti.goel@hotmail.com

5 Likes · 2 Comments · 90 Views
You may also like:
आद्य पत्रकार हैं नारद जी
सुरेश कुमार चतुर्वेदी
नींबू के मन की वेदना
Ram Krishan Rastogi
बेजुबान और कसाई
मनोज कर्ण
"अंतिम-सत्य..!"
Prabhudayal Raniwal
पिता
Raju Gajbhiye
विद्या पर दोहे
Dr. Sunita Singh
पिता आदर्श नायक हमारे
Buddha Prakash
(((मन नहीं लगता)))
दिनेश एल० "जैहिंद"
जानें कैसा धोखा है।
Taj Mohammad
Where is Humanity
Dheerendra Panchal
मज़दूर की महत्ता
Dr. Alpa H. Amin
अरदास
Vikas Sharma'Shivaaya'
कोई ना अपना रहनुमां है।
Taj Mohammad
सिपाही
Buddha Prakash
दुर्गावती:अमर्त्य विरांगना
दीपक झा रुद्रा
वक्त का खेल
AMRESH KUMAR VERMA
ऐ वतन!
Anamika Singh
हिन्दी साहित्य का फेसबुकिया काल
मनोज कर्ण
जुबान काट दी जाएगी - डी के निवातिया
डी. के. निवातिया
तेरी याद में
DR ARUN KUMAR SHASTRI
அழியக்கூடிய மற்றும் அழியாத
Shyam Sundar Subramanian
हे ! धरती गगन केऽ स्वामी...
मनोज कर्ण
लाडली की पुकार!
Dr. Arti 'Lokesh' Goel
देवता सो गये : देवता जाग गये!
ज्ञानीचोर ज्ञानीचोर
पितृ ऋण
Shyam Sundar Subramanian
💐उत्कर्ष💐
DR ARUN KUMAR SHASTRI
अफसोस-कर्मण्य
Shyam Pandey
साजन जाए बसे परदेस
Shivkumar Bilagrami
माँ
डा. सूर्यनारायण पाण्डेय
जिन्दगी रो पड़ी है।
Taj Mohammad
Loading...